हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति के संरक्षण में 20 घंटे का विशेष प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स क्लब में तीन दिन तक चलेगा कार्यक्रम
साईडलुक, जबलपुर। गांवों में छोटे-छोटे विवादों को गांव में ही सुलझाने और विवाद विहीन समाज की स्थापना के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर ने एक सार्थक पहल शुरू की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर एवं मुख्य संरक्षक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति विवेक रूसिया के संरक्षण तथा प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के मार्गदर्शन में सुदूर ग्रामीण अंचलों से चयनित ऊर्जावान और समाजसेवी व्यक्तियों के लिए तीन दिवसीय सामुदायिक मीडिएशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार से किया गया है।
यह 20 घंटे का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 सितंबर से 3 सितंबर तक जबलपुर के स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। शुभारंभ सत्र की मुख्य अतिथि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव रहीं। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि जहां एक से अधिक व्यक्ति होते हैं वहां विवाद होना स्वाभाविक है लेकिन उन विवादों का समय पर समाधान होना भी उतना ही आवश्यक है। सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य यही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले छोटे-मोटे आपसी झगड़ों, जमीन की मेड़, खेत की नाली और पारिवारिक विवादों का निपटारा अदालत तक पहुंचने से पहले ही सहज और व्यवहारिक तरीके से हो सके और आम ग्रामीण को सहज, सरल और सस्ता न्याय मिल सके।
प्रशिक्षण के पहले दिन एमसीपीसी की सीनियर ट्रेनर सुश्री रीमा भण्डारी और एसोसिएट ट्रेनर एवं सेवानिवृत्त प्रधान जिला न्यायाधीश सुश्री भावना साधौ ने प्रशिक्षणार्थियों को मध्यस्थता की बारीकियों से अवगत कराया। इस अवसर पर सालसा के अतिरिक्त सचिव अरविंद श्रीवास्तव, उप सचिव अनिरुद्ध जैन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर की सचिव शक्ति वर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी बी डी दीक्षित सहित जिला प्राधिकरण के कर्मचारी और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षणों से प्रशिक्षित मध्यस्थ गांव में ही न्याय के पहले पायदान के रूप में काम करेंगे जिससे न्यायालयों पर लंबित प्रकरणों का बोझ भी कम होगा।

