हर महीने 20 करोड़ की बचत, विपक्ष ने उठाए सवाल; ‘मिशन 2027’ की ओर बढ़ते कदम
साईडलुक डेस्क। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने प्रदेश की सड़कों पर ‘टोल लूट’ पर लगाम कसते हुए एक बड़ा और लोकप्रिय फैसला लिया है। सरकार ने अब तक कुल 19 टोल प्लाज़ा को स्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे आम यात्रियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को रोजाना करोड़ों रुपये की सीधी राहत मिल रही है ।
हालांकि, इस कदम को सियासी गर्माहट मिलने लगी है। जहां सरकार इसे ‘रंगला पंजाब’ की अपनी प्रतिबद्धता का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्षी दलों ने इस फैसले की आर्थिक व्यवहारिकता पर सवाल उठाते हुए सरकार से पारदर्शिता की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सत्ताधारी पार्टी के ‘मिशन 2027’ के तहत चुनावी हितों को भी साधता है ।
जेब पर पड़ने वाला बोझ हुआ कम
सरकार के इस फैसले से सबसे अधिक राहत आम दैनिक यात्रियों और छोटे व्यापारियों को मिली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन 19 टोल प्लाज़ाओं के बंद होने से अब यात्रियों को प्रतिदिन लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है ।
हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस उपलब्धि का बखान किया। उन्होंने कहा, “हमने 19 टोल प्लाज़ा बंद किए हैं। हम वादे नहीं, गारंटी देते हैं और उन्हें पूरा करते हैं।” उन्होंने बताया कि सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में दिए गए कई वादों को भी पार कर लिया है ।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के अनुसार, सरकार ने सत्ता में आने के बाद से लगभग 535.45 किलोमीटर लंबे राज्य राजमार्गों पर टोल को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी कंपनी को टोल संग्रह की अवधि बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।
किन रूटों पर मिली राहत?
बंद किए गए टोल प्लाज़ाओं में प्रमुख रूट शामिल हैं, जिनसे रोजाना हजारों लोग गुजरते थे। इनमें शामिल हैं। लाचोवाल टांडा (होशियारपुर रोड ₹1.94 लाख), माजरी, नंगल शहीदां, मानगढ़ बालाचौर (गढ़शंकर-दसूहा रोड ₹10.52 लाख), कीरतपुर साहिब (नंगल-ऊना रोड – ₹10.12 लाख), लड्डा और अहमदगढ़ लुधियाना (मलेरकोटला-संगरूर रोड ₹13 लाख), मोगा (कोटकपूरा रोड – ₹4.50 लाख), फाजिल्का (फिरोजपुर हाईवे – ₹6.34 लाख) इसके अलावा, समाणा-पातड़ां रोड, पटियाला-नाभा-मलेरकोटला रोड और दाखा-बरनाला स्टेट हाईवे पर भी टोल प्लाज़ा बंद किए गए हैं ।
‘मिशन 2027’ की ओर इशारा
हालांकि यह फैसला जनहित में लिया गया है, लेकिन राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर इसके समय पर भी है। आप पार्टी के संदेशों में ‘मिशन 2027’ का जिक्र किया जा रहा है, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक लंबी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है ।
विपक्षी दलों ने इस फैसले की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए सरकार से टोल ऑपरेटरों के साथ हुए समझौतों और संभावित मुआवजे के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है ।
टोल के बाद अब क्या?
टोल प्लाज़ा बंद करने की श्रृंखला अब थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री मान ने लुधियाना से बरनाला रूट पर स्थित दो और टोल प्लाज़ा—मुल्लांपुर (पास गांव रकबा) और महल कलां—को 2 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि से बंद करने की घोषणा की है। इन दोनों प्लाज़ाओं को बंद करने का फैसला कंपनी द्वारा कोविड काल और किसान आंदोलन के 448 दिनों को टोल अवधि में जोड़ने की मांग को खारिज करने के बाद लिया गया ।
इस बीच, सरकारी सूत्रों ने बताया है कि यातायात प्रवाह में सुधार और ईंधन की बचत के लिए अन्य परिवहन और सड़क बुनियादी ढांचे से जुड़े उपायों की भी समीक्षा की जा रही है ।
पंजाब सरकार का यह फैसला निस्संदेह ‘आम आदमी’ की जेब पर सीधा असर डालने वाला है। 19 टोल प्लाज़ाओं का बंद होना न केवल आर्थिक राहत देता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकार बुनियादी सुविधाओं को जनता के लिए सुलभ बनाने पर जोर दे रही है। हालांकि, इस फैसले के दीर्घकालिक प्रभावों और सड़क रखरखाव जैसी चुनौतियों पर आने वाले समय में बहस जारी रहने की संभावना है। फिलहाल, पंजाब के लाखों यात्रियों के लिए यह ‘रंगला पंजाब’ की एक सकारात्मक शुरुआत है ।
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