साईडलुक, सत्यजीत यादव। देश में बढ़ते डिजिटल लोन, क्रेडिट कार्ड और बैंकों से लिए गए व्यक्तिगत ऋणों के बीच एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा सामने आ रहा है। बैंकों द्वारा हायर की गई वसूली एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और उनकी निजता का उल्लंघन करना।
हो रहे फोन नंबर और सोशल अकाउंट हैक
क़र्ज़ चुकाने में असमर्थ ग्राहकों को प्रताड़ित करने के लिए कई बैंक गलत तरीके अपनाकर उन्हें मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का शिकार कर रहे हैं। इनमें शामिल है वसूली एजेंसियों द्वारा ग्राहकों के फोन नंबर और सोशल अकाउंट हैक करना। ग्राहक की जानकारी उनके परिचितों के सामने सार्वजनिक करना। फोनबुक में सेव नंबर पर लोन डिटेल भेज कर धमकाना। ये सभी आरबीआई की दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हैं, जो पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। देशभर से शिकायतें आ रही हैं कि कुछ एजेंसियां उपभोक्ता के मोबाइल डेटा तक पहुंच बना रही हैं, फोन में सेव नंबर निकाल रही हैं और उन जान-पहचान वालों को उपभोक्ता के लोन की जानकारी देकर शर्मिंदा कर रही हैं।
बैंकिंग सिस्टम में तय हो जवाबदेही
यह सिर्फ एक आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक संकट बनता जा रहा है। ज़रूरत है कि बैंकिंग सिस्टम में जवाबदेही तय हो और तकनीक का उपयोग उपभोक्ता के हित में हो, न कि उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने के लिए।
साइबर ब्लैकमेल और धमकियों का बढ़ता मामला
हाल ही में भारतभर में पेशेवर इन्सट्रा लोन ऐप्स और अनौपचारिक एजेंसियों द्वारा सामाजिक-शर्मनाक, साइबर ब्लैकमेल और धमकियों का बढ़ता मामला सामने आया है, जिसमें कई लोग आत्महत्या तक कर बैठते हैं। उदाहरण के तौर पर कई मामलों में बैंक या ऋण-शार्क से जुड़ी मानसिक प्रताड़ना को आत्महत्या का सीधा कारण बताया गया है।
अपमानजनक व्यवहार के चलते विवादों में बैंक
आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी जैसे बड़े बैंक रिकवरी एजेंट के अपमानजनक व्यवहार के चलते विवादों में रहे हैं, जहाँ मामलों में आत्महत्याओं की सूचना मिली है।
वसूली एजेंट द्वारा ग्राहकों से अप्रिय व्यवहार
हालाँकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने सीधे इस विषय पर मात्रात्मक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन उपभोक्ता शिकायत (बैंकिंग लोकपाल) आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018‑19 में सिर्फ भोपाल लोकपाल कार्यालय में ही 3,155 रखरखाव योग्य शिकायतें दर्ज थीं, जिनमें से कई शिकायतें वसूली एजेंट द्वारा ग्राहकों से अप्रिय व्यवहार पर आधारित थीं।
मानसिक उत्पीड़न के कारण हज़ारों आत्महत्या
पिछले 10 वर्षों में हज़ारों आत्महत्या ऐसी हुईं जिनके सुसाइड नोट में मानसिक उत्पीड़न, ऋण वसूली का दबाव का जुर्माना ज़िक्र मिला है। विशेषकर ऐप और एजेंट द्वारा अपनाया गया गेमिंग से।
कानून उनके साथ खड़ा है
मध्यप्रदेश में सबसे अधिक कार्रवाई योग्य शिकायतें भोपाल लोकपाल में दर्ज होती हैं (लगभग 3 से 4 हजार वार्षिक)। जिनमें से अभिभूत उत्पीड़न संबंधित कई शिकायतें हैं। ग्राहक न तो दोषी ठहराए जाते हैं क्योंकि पैसा न होने पर कोई अपराध नहीं होता। कानून उनके साथ खड़ा है।
3 हज़ार से अधिक को शिकायतें
मध्यप्रदेश में ब्याज और ऋण वसूली एजेंट द्वारा उत्पीड़न की ताज़ा संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपरोक्त शिकायत डेटा से अनुमान लगाया जा सकता है कि केवल भोपाल लोकपाल कार्यालय में ही हर वर्ष 3 हज़ार से अधिक को शिकायतें दर्ज होती हैं।
जमीनी हकीकत कुछ ओर
बैंकों द्वारा वसूली एजेंटों के दुरुपयोग की घटनाएं गंभीर रूप से बढ़ रही हैं, जिससे जनता में डर और असुरक्षा की भावना फैल रही है। आबीआई ने स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं वसूली एजेंट ग्राहकों को निर्दयी व्यवहार दिखा नहीं सकते, और ग्राहक को भी अपना अधिकार जानना चाहिए। परंतु, जमीनी हकीकत में बहुत कम बैंक इन नियमों का प्रभावी पालन कर रहे हैं।
आबीआई के स्पष्ट आदेश व गाईडलाईन
रिकवरी (वसूली) एजेंट ग्राहकों से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं कर सकते। किसी प्रकार की उज्जलना, धमकी, सार्वजनिक अपमान या निजी जानकारी का खुलासा वर्जित है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या मोबाइल पर धमकाने वाले संदेश और अनधिकृत कॉल भी नियमों के खिलाफ हैं। ऐसे एजेंटों द्वारा की गई हर गतिविधि के लिए बैंक पूरी जिम्मेदारी उठाएगा, क्योंकि एजेंट बैंकों का आउटसोर्स्ड पार्ट होता है।
आबीआई की सख्त गाइडलाइन, लेकिन पालन नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) ने स्पष्ट गाइडलाइनों में कहा है कि कोई भी बैंक या उसकी एजेंसी उपभोक्ता की निजी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति से साझा नहीं कर सकती, और वसूली प्रक्रिया में सम्मानजनक व शालीन व्यवहार करना अनिवार्य है।
आबीआई को यह कदम उठाने की ज़रूरत
आरबीआई और सरकार को यह कदम उठाने की ज़रूरत है। जिसमें वसूली एजेंसियों के लिए सख्त लाइसेंस व्यवस्था बने, ग्राहकों की गोपनीय जानकारी की रक्षा सुनिश्चित हो, मानसिक उत्पीड़न को आपराधिक श्रेणी में लाकर कार्रवाई हो, जैसी कार्रवाई होना चाहिए। जिससे RBI गाईडलाईन का पालन हो सके।
मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में घटनाएं
पिछले 10 वर्षों में देशभर में हजारों मामले सामने आ चुके हैं जहां वसूली एजेंटों की प्रताड़ना से परेशान होकर लोगों ने आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लिया। विशेष रूप से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और दिल्ली से दर्जनों केस दर्ज हुए हैं। मध्यप्रदेश में 2021-2024 के बीच करीब 130 से अधिक मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज की गईं।
मध्यप्रदेश की स्थिति, पूरी जानकारी उपलब्ध ही नहीं
मध्यप्रदेश में आरबीआई-लोकपाल के कार्यालय (भोपाल) को औसतन हर वर्ष 3 हज़ार शिकायतें मिलती हैं, लेकिन इनमें कितनी सीधे रिकवरी एजेंट उत्पीड़न से जुड़ी, इसका विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक नहीं है। राज्य में अक्सर रुपये देने की असमर्थता, धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ी शिकायतें आम हैं, मगर सरकारी आंकड़ों में इस विशेष श्रेणी की पूरी जानकारी उपलब्ध ही नहीं है।
बैंक शिकायत नहीं लेते, एजेंसियां होती हैं बेलगाम
यदि बैंक लिखित शिकायत लेने से मना करे तो ग्राहक गैर-जिम्मेदार गोपनीयता उल्लंघन के तहत पुलिस में या साइबर अपराध शाखा में शिकायत करें। अक्सर पीड़ित जब शाखा में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करती है। इस स्थिति में उपभोक्ता के पास RBI के बैंकिंग लोकपाल या उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने का ही रास्ता बचता है। आप एफबीआई के उपभोक्ता शिकायत तंत्र, बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों या आरबीआई लोकपाल को ईमेल का प्रमाण भेज कर कार्रवाई मांग सकते हैं।
कानूनी और न्यायिक आधार
आईपीसी सेक्शन 506, 507, 509 के तहत फोन पर धमकी, मानहानि, चरित्र हनन आदि अपराध माने गए हैं, जो गैर जमानती अपराध है। सुप्रीम कोर्ट के एक केस आईसीआईसीआई बैंक विरूध शान्ती देवी शर्मा (वर्ष 2027) ने साफ किया कि बैंक वसूली एजेंसी एजेन्ट को ग्राहक को अपमानजनक तरीके से परेशान करने पर प्रतिबंध है। आरबीआई ने वर्ष 2007 और 2024 में वसूली एजेन्ट्स की संवेदनशीलता, नागरिक आचरण के लिए दिशा निर्देशों जारी की हैं। जो अभी भी कुछ बैंक पालन नहीं कर रहे हैं।
यह हो सकता है आपका विकल्प
शांत रहें, सबूत इकट्ठा करें (रिवर्स कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, विजिट ईमेल व पत्र) आदि। बैंक व एनबीएफसी शिकायत कक्ष में लिखित शिकायत दें। आरबीआई लोकपाल में वृद्धि करें। पुलिस में उत्पीड़न या साइबर क्राइम रिपोर्ट करें। आवश्यक हो तो उपभोक्ता अदालत व न्यायिक सहायता लें। ऋण निपटान या पुनर्गठन का विकल्प खोजें।
कोर्ट-निर्मित न्यायालयीन दिशा
यदि बैंक वसूली एजेंटों के अनुचित व्यवहार से जान-मन को परेशानी दे रहे हैं, तो ग्राहक के पास निम्न कानूनी उपाय हैं। जैसे बैंक की शिकायत विभाग या आरबीआई बैंकिंग लोकपाल को शिकायत दर्ज करें।पुलिस में मानसिक यातना, धमकी, गोपनीयता उल्लंघन की शिकायत दर्ज करें (बीएनएसएस व बीएनएस अधिनियम के तहत)। उपभोक्ता रक्षा अदालत या नागरिक अदालत में क्षतिपूर्ति व रोक आदेश मांगें। पैसे की झूठी जानकारी साझा करने पर मानहानि का दावा करें। एजेंट की पहचान पूछें, पहचान देखें, विधिक अधिकारों का प्रयोग करें।
तय करें जांच और जिम्मेदारी
इस तरह के एक और मामले में सिटीबैंक और एसबीआई पर हाई कोर्ट के फैसले भी बैंक को वसूली एजेंटों की गतिविधियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए बाध्य करते हैं।
सख्ती से लागू करना समय की मांग
यदि बैंक पुनरावृत्ति करते हैं, तो आबीआई के पास निगरानी अधिकार, बैन अथवा दंडात्मक कार्रवाई की शक्ति है। जो अब तक इधर-उधर छूट रहा है, उसको सख्ती से लागू करना समय की मांग है।
क्या अपराधी बना दिया जाएगा ?
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वह संकट में होते हैं और समय पर किश्त नहीं भर पाते, तो उनसे अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। उन्हें बार-बार कॉल, व्हाट्सएप मैसेज, धमकी भरे संदेश भेजे जाते हैं, यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी टैग किया जाता है।
अगर पैसे न हों, तो क्या करें ?
जीरो रिपेमेन्ट भी कोई अपराध नहीं है। ओवरड्यू होने पर हो सकता है आपका सिबिल स्कोर प्रभावित हो, लेकिन उत्पीड़न अपराध नहीं माना जाएगा। आपको सुरक्षा कानूनों का अधिकार है। आप छोटे-ब्याज, किस्त योजना, लोन सेटलमेन्ट के लिए बैंक व एनबीएफसी से संपर्क कर सकते हैं। स्थायी लोन को समाप्त करते हुये नहीं, मगर समझौता संभव है।
आबीआई ने किन बैंक पर कार्रवाई की ?
आईसीआईसीआई बैंक विरूध शान्ती देवी शर्मा (2007): सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किया गया कि बैंक “गुन्डा-शक्ति” का उपयोग कर ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकते। सभी वसूली प्रयास कानूनी और मानव सम्मानपूर्ण होने चाहिए।
लगा एक करोड़ रुपये का जुर्माना
एचडीएफसी बैंक को एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। क्योंकि उसके वसूली एजेंट ग्राहकों को आरक्षण समय (सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक) के बाहर कॉल कर रहे थे, गोपनीयता से खिलवाड़ कर रहे थे और ग्राहकों को मानसिक तनाव में डाल रहे थे। RBI ने स्पष्ट किया है कि किसी बैंक को भी वसूली एजेंटों द्वारा की गई हरकतों पर सख्त नजर रखनी चाहिए, अन्यथा बैंक के खिलाफ निगरानी कार्रवाई, क्षेत्रीय बैन या अनुशासनात्मक कदम उठाया जा सकता है।
प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार पाया
दूसरे मामले में दिल्ली उपभोक्ता फोरम (एचडीएफसी मामला, 2019): बैंक प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार पाया गया और क्षतिपूर्ति आदेशित की गई।

