स्वच्छ भारत अभियान में तिलवारा घाट शामिल नहीं, कई जगाहों पर फोटो खिचवाने तक सीमीत है स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम
साईडलुक (सत्यजीत यादव)। देश भर में स्वच्छ भारत अभियान के 10 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। वहीं मध्यप्रदेश के एक जिले जबलपुर में मॉं नर्मदा का घाट इस अभियान से कटा हुआ है।
घाट किनारे फैली गंदगी ने यहॉं आने वाले मॉं नर्मदा के श्रद्धालुओं को घाट पर फैली अव्यवस्था ने झन्झोर कर रख दिया है। करोड़ों की लागत से सफाई केवल कागज़ों पर सिमटे होने के कारण लोगों में अब नाराज़गी बढ रही है। लोगों का कहना है कि यह हमारी आस्था पर प्रहार किया जा रहा है। भ्रष्ट सरकारी तंत्र और खराब ठेका प्रथा के चलते अब तो मॉं नर्मदा के साथ छल करने से भी नहीं चुका जा रहा है।
गंदगी से श्रद्धालुओं का मन दुखी
घाट पर मॉं नर्मदा के दर्शन करने आये कपिल सेन, सुजीत कुमार, विकास दाहिया, शैलेन्द्र राजपूत, मुन्ना यादव व अन्य लोगों ने बताया कि नवरात्र के पावन पर्व में सुबह सुबह मॉं नर्मदा के दर्शन करने तिलवारा घाट पहुचें तो यहॉं जगह जगह फैली गंदगी से मन बहुत दुखी हो गया। पवित्र नदी नर्मदा के आसपास करोड़ो रुपयों से बने पक्के घाटों की सफाई व्यवस्था न होना, हमारे मन को कचोटता है।
आस्था पर भी भ्रष्टाचार की छाया
नर्मदा के घाटों पर शासन स्तर पर बड़ी संख्या में सफाई कराने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए जहॉं भी जरूरी हो वहॉं सरकारी सफाई कर्मी सहित पाईवेट सफाई ठेके की व्यवस्था में करोड़ों रुपयों खर्च किए जा रहे हैंं। लेकिंन हकीकत में यह तमाम जद्दोज़हद केवल सरकारी कागज़ों में दर्ज किए जाते हैंं, वास्तविता से इसका कोई सरोकार नहीं है।
नर्मदा के नाम पर केवल राजनीति
हमारी आस्था के प्रतिक मॉं नर्मदा के पवित्र घाटों पर बड़ी संख्या में लोगों का आना जाना है। यहॉं स्नान, दान, पुजा, पाठ कर लोगों के मन में शान्ती उत्पन्न होती है। लेकिंन नर्मदा के घाटों की दुर्दशा देख अनेकों लोगों की आस्था पर ठोस पहुच रही है। लोगों का कहना है कि नेतागण अपनी राजनीति चमकाने के लिए घाटों पर तो आते हैं, लेकिंन यहॉं की मुलभूत सुविधा के लिए कोई आगे नहीं आता, केवल मॉ नर्मदा के नाम पर राजनैतिक रोटियॉं ही सेकी जाती हैं।
महापौर ने भी किया था वादा
जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह ने भी चुनाव जीतने के लिए शहर के भोलीभाली जनता से वादा किया था कि महापौर बनने के बाद नर्मदा नदी में नालों के गंदे पानी को मिलने से रोकने के लिए सबसे पहले परियोजना बना कर उस फाईल में साईन करूंगा, बाकी सब इसके बाद करूगां। लोग उनके झुठे वादों पर विश्वास कर फंस गये लेकिंन आजतक मॉं नर्मदा में मिलने वाले मल, केमिकल युक्त गंदे और जहरीले पानी को रोकने के लिए केवल रस्म अदायेगी की गई, इस गभ्भीर समस्या के लिए कड़े कदम नहीं उठायें गये। इसका कड़ा विरोध न हो, इसलीए उन्होंने अब पाला बदल लिया है।
सत्तापक्ष से मिलीभगत का अरोप
घाटों में आने वाले लोगों से इस विषय में जब बात की गई तो अनेकों लोगो का कहना है कि जब सत्तापक्ष से किसी काम में कोई गलती हो, या किसी जनहित मुद्दों की अनदेखी हो तो हम विपक्ष के नेतागणों से उम्मीद करते हैं कि वो जनहित के मुद्दों पर आम लोगों के साथ खड़े रहें। लेकिंन अब स्थति पहले की तरहा नहीं दिख रही। अब तो लगता है कि विपक्ष सत्तापक्ष से मिलकर जनमानस की भावनाओं की अनदेखी कर अपना लाभ अर्जित करने में लगे हैं।
हमारी भी बनती है जिम्मेदारी
भ्रष्टतंत्र के चपेट में आमजन तो थे ही, अब भ्रष्टाचार हमारे आस्था के इर्दर्गीद भी फैलने लगा है। अब कई बेइमान लोग पैसों के इतने भूखे हो गये हैं कि उनका दायरा बढकर पवित्र स्थलों तक भी पहुचने लगा है। आम लोगों को नर्मदा के घटो की सफाई के लिए भ्रष्टतंत्र की ओर देखने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। धर्म और आस्था हमारी है। इसका संरक्षण और रक्षा हमें ही करना है तो इस तरह की जगाहों पर सफाई अभीयान हमें ही करना होगा। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि धर्मस्थालों व पवित्र स्थानों में सेवा देकर साफ सफाई का ध्यान रखें।


