जबलपुर, डेस्क। मप्र उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने निलंबित टीआई संदीप आयाची की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी। मामला महिला पुलिस कर्मी से शादी का प्रलोभन देकर शोषण के आरोप से संबंधित है। इससे पूर्व अपर सत्र न्यायाधीश उर्मिला यादव की अदालत से भी झटका लग चुका है। आपत्तिकर्ता पीडिता महिला पुलिस कर्मी की ओर से अधिवक्ता कहकशां मंसरी, राहुल राजपूत व आलोक तिवारी ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आवेदक पर गंभीर आरोप लगा है। इसके अनुसार आवेदक ने पीड़िता को शादी का प्रलोभन देकर निरंतर शारीरिक शोषण किया। चूंकि आवेदक प्रभावशाली है, और उससे पीड़िता को जान का खतरा है, इस वजह से अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त किए जाने योग्य है। इस तरह के मामले में गिरफ्तारी के बिना जमानत पर रिहा करने के आदेश से समाज में गलत संदेश जाएगा। शिकायत में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार आवेदक के इरादे बेहद खतरनाक रहे हैं। वह पीड़िता को जान से मारने की धमकी दे चुका है। जबलपुर व कटनी में टीआई रहते हुए उसने रसूख बना लिया है। वह मूलत: दमोह निवासी है, और उसके संबंध हर तरह के वर्ग से हैं। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। न्यायालय ने तर्क से सहमत होकर अग्रिम जमानत देने से मना करते हुए आवेदन निरस्त कर दिया।

