डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। जिला मुख्यालय डिंडौरी में इन दिनों अवैध शराब के कारोबार ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ठेकेदारों के इशारे पर काम कर रहे उनके गुर्गे, अब बेखौफ होकर रात के अंधेरे में स्कूटी जैसी दोपहिया गाड़ियों से अवैध शराब की खेप मोहल्लों और गलियों तक पहुंचा रहे हैं।
यह सब कुछ उस समय हो रहा है जब शहर के अधिकांश चौक-चौराहों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके बावजूद न तो पुलिस, न आबकारी विभाग और न ही प्रशासन की कोई ठोस कार्रवाई सामने आ रही है। कार्रवाई के नाम पर केवल कागजों में खानापूर्ति होती दिखाई दे रही है।
स्कूटी बना तस्करी का नया जरिया…
अवैध शराब सप्लाई करने वालों ने अब बड़े वाहनों के बजाय स्कूटी जैसे छोटे और चालाक वाहनों को चुना है, जो आसानी से निगरानी से बच जाते हैं। ये गुर्गे कॉलोनी, गली और मोहल्लों में शराब की होम डिलीवरी तक कर रहे हैं। यह सब कुछ एक सटीक नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर “आँख मूँद” सहयोग भी होने की आशंका है।
प्रशासन की चुप्पी खतरनाक संकेत…
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को पूरे प्रकरण की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है। कुछ जगहों पर केवल दिखावटी रेड या ज़ब्ती की कार्रवाई कर ली जाती है, लेकिन शराब का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी रहता है।
क्या अधिकारियों की रजामंदी से चल रहा है कारोबार..?
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह संभव नहीं कि शहर में इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब बिके और अधिकारियों को जानकारी न हो। सवाल उठता है कि क्या यह सब कुछ अधिकारियों की मिलीभगत और संरक्षण में हो रहा है? यदि नहीं, तो फिर अब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी पर उठे सवाल…
डिंडौरी शहर में जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे आम नागरिकों के लिए तो कड़ी निगरानी का माध्यम बन गए हैं, लेकिन शराब माफिया पर इन कैमरों का कोई असर नहीं दिखता। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन कैमरों की निगरानी करने वाला सिस्टम निष्क्रिय है, या फिर जानबूझकर नजरें फेर ली जा रही हैं?
पुलिस की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति…
विगत दिनों ग्राम लाखों में गुरुवार रात ग्रामीणों ने एक पेटी अवैध शराब पकड़ी और पुलिस को सूचना दी, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस मौके पर पहुंची जरूर, मगर सिर्फ शराब जब्त कर खानापूर्ति कर लौट गई। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
महिलाओं में गुस्सा…
अवैध शराब की बढ़ती उपलब्धता से सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग और घरेलू महिलाएं हो रही हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि शराब ने कई घरों की शांति छीन ली है, और अब बर्दाश्त की सीमा पार हो चुकी है। यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो नागरिक आंदोलन की राह पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस गोरखधंधे पर नकेल कसने की हिम्मत जुटा पाएगा या डिंडौरी की सड़कों पर यूं ही स्कूटी से शराब बिकती रहेगी?



