अभिषेक दीपके बोले– ‘यदि छात्रों पर कार्रवाई नहीं रुकी तो देशभर में फिर शुरू होगा आंदोलन’, सरकार बोली– कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा फैसला
साईडलुक, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद एक बार फिर देश की राजनीति और छात्र संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। CJP के संस्थापक *अभिषेक दीपके* ने केंद्र सरकार पर आंदोलन समाप्त कराने के दौरान हुए समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन बिहार, पश्चिम बंगाल, असम तथा कुछ अन्य राज्यों से छात्रों की गिरफ्तारी, हिरासत और नए मामलों की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में यदि सभी FIR वापस नहीं ली गईं और कार्रवाई नहीं रुकी तो CJP दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
CJP का आरोप है कि कई राज्यों में आंदोलन में शामिल छात्रों को अब भी पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि बिहार में छात्र नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की शिकायतें मिली हैं और असम से भी छात्रों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। CJP का दावा है कि यह सब उस आश्वासन के विपरीत है, जिसके आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था।
अभिषेक दीपके ने कहा कि आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए किया गया था। उनका कहना है कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया तो CJP फिर से पूरे देश में छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के साथ लोकतांत्रिक आंदोलन का आह्वान करेगा। संगठन ने मांग की है कि केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों में आंदोलन से जुड़े सभी मामलों की समीक्षा कर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर केंद्र सरकार का पक्ष इससे अलग है। सरकार ने पहले हुई वार्ता के दौरान कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के संबंध में कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी तथा जहां संभव होगा वहां FIR वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का यह भी कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले को केवल राजनीतिक घोषणा के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता और प्रत्येक मामले में संबंधित राज्य सरकार, पुलिस तथा न्यायालय की कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यदि आंदोलन समाप्त कराने के लिए लिखित या मौखिक आश्वासन दिया गया था तो उसका पालन समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। उनका कहना है कि छात्रों पर दर्ज मामलों की समीक्षा कर निर्दोष प्रदर्शनकारियों को राहत दी जानी चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर सार्थक संवाद आगे बढ़ सके। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार परीक्षा सुधारों पर गंभीरता से काम कर रही है और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में कोई भी निर्णय विधिक प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब विवाद केवल NEET या परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों, पुलिस कार्रवाई और सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन का मुद्दा बन गया है। यदि आने वाले दिनों में राज्यों में दर्ज मामलों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो यह विषय एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति और छात्र आंदोलनों के केंद्र में आ सकता है। दूसरी ओर यदि सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित अगली बैठक में सहमति बनती है तो टकराव की स्थिति टल सकती है।

