डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन|जिले में शहरी विकास की नई इबारत लिखी जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। लंबे समय से नगर पालिका का सपना देख रहे डिंडौरी नगरवासियों के लिए राहत की खबर है। डिंडौरी नगर परिषद को नगर पालिका परिषद का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। हाल ही में जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की, जिससे इस विषय को लेकर प्रशासनिक और जन स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
23 ग्राम होंगी शामिल..
प्रस्ताव के अनुसार, नगर परिषद डिंडौरी की सीमा से सटे कुल 23 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल करने की योजना बनाई गई है। यह प्रस्ताव न सिर्फ डिंडौरी शहर के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा। ग्राम पंचायतों के नगर क्षेत्र में शामिल होने से उनका प्रशासनिक ढांचा बदलेगा और विकास योजनाओं का स्वरूप पूरी तरह शहरी होगा।
इन ग्राम की ली गई समीक्षा बैठक…
घानाघाट, कनईसांगवा, दंड बिछिया, सरहरी, सिमरिया, कूड़ा, धनुआसागर, चटूवा, खीरसारी, इमलई, रयपूरा, दंडविदयपुर, पड़रिया माल, देवरीमाल, धुर्रा माल, उदरी माल, औराई, शुब खार, धमनगांव, हिनौता, देवरा, बिजोरा और विदयपुर शामिल हैं।
गांवों में मचा चर्चा का दौर..
जैसे ही यह खबर आमजन तक पहुंची, वैसे ही शामिल की जा रही ग्राम पंचायतों में चर्चा का माहौल बन गया। ग्रामवासियों के बीच यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन चुका है कि इस बदलाव से लाभ अधिक होंगे या नुकसान। एक वर्ग का मानना है कि नगर पालिका क्षेत्र में आने से सड़क, सीवरेज, नलजल योजना, बिजली, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता जैसी सुविधाएं तेज़ी से विकसित होंगी। वहीं, दूसरे वर्ग को आशंका है कि संपत्ति कर, वाणिज्यिक टैक्स, और शहरी नियमों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही उन्हें डर है कि इससे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), और अन्य ग्रामीण योजनाएं बंद हो जाएंगी, जिससे गरीब, किसान और मजदूर वर्ग प्रभावित हो सकता है।
प्रशासनिक हलचल तेज, प्रस्ताव पर चल रहा मंथन…
इस प्रक्रिया को मूर्त रूप देने के लिए डिंडौरी जनपद पंचायत के सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें राजस्व विभाग, पंचायत विभाग और नगर परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रस्तावित नगर पालिका क्षेत्र की सीमाएं, जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, और संस्थागत ढांचे पर गहन विचार-विमर्श किया गया। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले जनसुनवाइयों और पंचायत-स्तरीय बैठकों का आयोजन करने की योजना है, ताकि ग्रामीणों की राय भी प्रस्ताव में सम्मिलित की जा सके।
नगर पालिका का दर्जा मिलते ही बदलेगा विकास का परिदृश्य…
डिंडौरी नगर परिषद को नगर पालिका का दर्जा मिलने से यहां शहरी विकास योजनाएं, जैसे कि अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), स्मार्ट स्ट्रीट लाइट, और आवास योजना (शहरी) जैसे प्रोजेक्ट लागू होंगे। इससे न सिर्फ नगर क्षेत्र की सूरत बदलेगी, बल्कि आसपास के गांवों को भी नई पहचान और सुविधाएं मिलेंगी।
सबकी निगाहें कलेक्टर के प्रस्ताव पर टिकी…
अब इस पूरी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव कलेक्टर द्वारा शासन को भेजा जाने वाला प्रस्ताव है, जो इस ऐतिहासिक बदलाव की दिशा और दशा तय करेगा। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो डिंडौरी को न सिर्फ नगर पालिका का दर्जा मिलेगा, बल्कि यह जिले के तेज गति से उभरते शहरी केंद्र के रूप में स्थापित होगा। डिंडौरी जिले के लिए यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक बदलाव की शुरुआत हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में इस अंचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल देगा।



