भोपाल। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षकों को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की ड्यूटी से मुक्त किए जाने को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी है। आयोग को विभिन्न जिलों के भ्रमण के दौरान शिक्षकों ने शिकायत दी थी कि उन्हें बीएलओ कार्य में लगाया जा रहा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

आयोग की अध्यक्ष देवेंद्र गोरे ने इस विषय में गंभीरता दिखाते हुए विभागीय सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि पूर्व में भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2013 को आदेश जारी किया गया था, जिसमें शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की बात कही गई थी। बावजूद इसके अब भी शिक्षकों से बीएलओ जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी से छात्रों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है, जो कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम का उल्लंघन है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों से केवल शैक्षणिक गतिविधियाँ ही करवाई जानी चाहिए। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि तत्काल प्रभाव से शिक्षकों को बीएलओ जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए और भविष्य में ऐसे निर्देश जारी न हों। इस मामले की जानकारी आयोग को 15 दिवस के भीतर प्रेषित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। यह कदम राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।



