राज कर रहे रेत माफिया, कार्रवाई करने से परहेज कर नेता—अफसर…
ग्राउंड रिपोर्ट: खनिज विभाग की टीम को नहीं मिलती पानी के अंदर मशीनें,न ही दिखाई देती पानी के अंदर बनाई गई रैम्प…
https://youtu.be/Xv0atKWDz1k?si=bC19J9Kqrk83GzxM
डिंडौरी, रामसहाय मर्दन। जिले में रेत माफिया हावी हो गये है। जिले भर में अवैध रेत के खेल से राजस्व को क्षति पहुंचाई जा रही है। एनजीटी के नियमों के विरूध्द बीच नदी से पोकलेन मशीन के जरिये रेत निकाली जा रही है, बावजूद अधिकारी और नेता कुंभकरण की नींद सो रहे है।
क्या रेत कारोबारी को प्रशासनिक महकमे का खुला संरक्षण..?
गौरतलब यह कि दीपावली के पूर्व से ही दीवारी रेत खदान में रेत कारोबारी के इशारों पर गुर्गों द्वारा की जा रही मनमानी और पर्यावरणीय मंजूरी के नियम – निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाये जाने कि खबरें लगातार प्रकाशित की जा रही है,उसके बावजूद रेत कारोबारी पर नकेल कसने में जिला प्रशासन पूरी तरह नाकाम है।
अब दीवारी रेत खदान छोड़ ग्राम कमको मोहनिया रेत खदान में जमाया डेरा…
चंद रोजों में ही रेत कारोबारी ने दीवारी रेत खदान से तगड़ा मुनाफा कमाया और अब दीवारी छोड़ ग्राम कमको मोहनिया में डेरा जमा लिया। जहाँ विगत दो सप्ताह से दिन और रात पोकलेन मशीन का इस्तेमाल कर नदी के बीचों – बीच करीब बारह से पंद्रह फीट का गड्ढा कर रेत निकाली जा रही है। आलम यह है कि चंद रोजों मे ही उक्त स्थल पर रेम्प भी तैयार हो गये है, जो आगे भी बढ़ते रहेंगे। लिहाजा शासन – प्रशासन कि भूमिका पर संदेह लाजिमी है। क्यों कि यहाँ भी सब कुछ दीवारी रेत खदान में की गई मनमानी के ही तर्ज पर चल रहा है और सहायक मानचित्रकार से प्रभारी खनिज निरीक्षक बने उज्जवल पटले ने सब कुछ देखते समझते शराफत का लबादा ओढ़ रखा है।
स्थानीय ग्रामीणों में दिखी नाराजगी…
बता दे कि विगत दिन मंगलवार को जब मीडिया की टीम प्रातः कमको खदान क्षेत्र पहुंचे तो मुख्य मार्ग से महज 250 मीटर दूर ग्रामीण एकत्रित हो सडक पर खड़े थे, उन्होंने बताया कि ठेकेदार के आदमियों द्वारा लगभग दो सप्ताह से नदी से रेत निकाली जा रही है, जिसके चलते गाँव मे भारी वाहनो कि आवाजाही बनी हुई है, उक्त वाहनो से उड़ने वाला धूल का गुब्बार सारे गाँव में दिनरात छाया रहता है, जबकि ठेकेदार को रोजाना समय – समय पर पानी का छिड़काव कराना चाहिये, जो कि आज तक नहीं किया गया।
धूल के गुब्बार से वनस्पतियों को हो रहा नुकसान….
धूल के गुब्बार का प्रभाव उनके फसलों, पेड़ – पौधो व ग्रामीणों की सेहत पर पड़ता है, अन्यथा वह वाहन खदान क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने देंगे। और कुछ डंपर चालकों को तो उन्होंने बाहर के बाहर ही भगा दिया। एक ग्रामीण सोनसिंह पेंन्द्रो ने तो यहां तक बताया कि बारिश के दरमियाँ उनका इस मार्ग से निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ना विकास किया ना रोजगार दिया….
ग्रामीणो ने यह भी बताया कि जबसे खदान चल रही है,तबसे आज तक इस क्षेत्र में ना तो कोई विकास हुआ और ना ही रोजगार के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे है। जिसके चलते अक्सर ग्रामीणों के सामने पलायन की स्थिति निर्मित होती है। कमको में चार से पांच टोले है, और टोले के दिन बंधे हुये है, फॉर देवरी दादार क्षेत्र से भी अवैध खनन किया जाता है तो वहां के लोगों को भी एक अतिरिक्त दिन मजदूरी पर रखा जाता है.इसके अलावा देर रात तो मशीनों से ही रेत निकासी और मशीनो से ही लोडिंग भी की जाती है, जिसके चलते भी रोजगार मारा जाता है।
आबादी क्षेत्र में नहीं लगी लाइटें….
हाल ही मे रेत कारोबारी के गुर्गे ने यू ट्यूबर के माध्यम से अपने कर्मियों को सामने कर विद्युत व्यवस्था के नाम पर स्वयं की पीठ थपथपाई थी, लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि आबादी क्षेत्र छोड़ ठेकेदार के कर्मियों ने स्वयंहित में मात्र पांच से छः लाइट लगाई है, जिनसे ग्रामीणो को कोई फायदा नहीं है।
क्या अधिकारी आंखों में पटटी बांधकर जांच करने जाते है खदान…?
विगत दिनों जब मीडिया की टीम कार्यालय कलेक्टर.. खनिज शाखा पहुंचे तो वहां प्रभारी खनिज निरीक्षक से बमुश्किल मुलाकात हो पाई, जिसमें उन्होंने दीवारी खदान को बंद होना बताया और कमको मोहनिया खदान में मशीन ना चलने की बात कही जबकि मीडियाकर्मियों द्वारा उन्हें सब कुछ बताया गया कि कमको खदान में नियम – निर्देशों से परे बीच नदी में मशीनो से काम किया जा रहा है। वहीं जब खनिज विभाग की टीम जांच के लिये रेत खदान पहुंचती है,तो उन्हें मशीनें नहीं मिलती है, न ही रेत ठेकेदार के गुर्गों द्वारा बनाई गई रैम्प। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि रेत खदान पहुंचते ही खनिज विभाग के अधिकारी आंखों में पटटी बांध लेते है। जिसके कारण कुछ ही दिखाई नहीं देता है। इनको सही ढंग से जांच करना है,न ही कार्रवाई। आखिर कब तक चलता रहेगा जिले में अवैध रेत का खेल…?



