डिंडौरी,राठौर रामसहाय मर्दन| जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत करौंदी में मनरेगा योजना के तहत बने चेक डैम निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई है। 10 लाख 53 हजार 467 रुपये की लागत से बने इस चैकडैम को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण एवं पत्रकार भीमशंकर साहू ने मंगलवार को डिण्डौरी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से शिकायत कर जांच की मांग की है। बताया गया कि यह चेक डैम वर्ष 2021 में स्वीकृत हुआ था और इसका निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा जून 2025 में कराया गया। निर्माण कार्य का ठेका स्थानीय सप्लायर मनीष कुमार साहू (पिता रामलाल साहू, निवासी ग्राम बरगांव) को दिया गया।

शिकायत में आरोप है कि कार्य में गांव के मजदूरों की बजाय बाहरी मजदूरों को लगाया गया, जो मनरेगा के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। ग्रामीणों द्वारा निर्माण स्थल से बनाए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि भारी मात्रा में बोल्डर का उपयोग किया गया है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार यह अनियमित है। इसके अलावा, निर्माण में 20mm गिट्टी की जगह मिट्टी युक्त 40mm गिट्टी का उपयोग किया गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस मामले में जनपद पंचायत शहपुरा के उपयंत्री विकास सोनगोत्रा को कई बार मौका स्थल पर बुलाया गया, लेकिन वे निर्माण कार्य के दौरान मौके पर नहीं पहुंचे। शिकायत के अनुसार, वे तब पहुंचे जब बोल्डर पूरी तरह डाले जा चुके थे। ग्रामीणों ने मौखिक रूप से जनपद सीईओ अरविंद बोरकर से भी शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने भी जांच में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते ठेकेदार को मनमाने तरीके से कार्य कराने का मौका मिल गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच, सचिव एवं जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय राशि की बंदरबांट की गई है।बता दें कि इसी ठेकेदार मनीष कुमार साहू द्वारा कुछ माह पहले खेरमाई रोड, सीसी रोड एवं नाली निर्माण सहित अन्य कार्य भी कराए गए थे, जिनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब रही और जिनकी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में की गई थीं। परंतु कुछ शिकायतें दबाव बनाकर वापस कराई गईं और अब तक किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ता भीमशंकर साहू ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि इस निर्माण कार्य की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए जब तक जांच पूरी न हो जाए। वहीं इस पर जिला पंचायत सीईओ अनिल कुमार राठौर ने कहा है कि “इसकी जांच ईई (उपयंत्री) से करवाई जाएगी।



