पंचायतों में बढ़ती दखलंदाजी, जनपद समनापुर के कई ग्रामों में सरपंच पतियों का कब्जा….
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। जिले की पंचायत राजनीति में इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है, जहां महिला सरपंचों के नाम पर जीत दर्ज करने के बाद उनके पति पंचायत की बागडोर अपने हाथ में ले रहे हैं। जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में यह चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे महिला सशक्तिकरण को सीधा आघात पहुंच रहा है।
बता दें कि सरपंच पति खुद को सरपंच समझते हुए खुलेआम सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ग्राम सभा, निर्माण कार्यों की निगरानी, भुगतान की अनुशंसा से लेकर अधिकारियों से पत्राचार तक – हर जिम्मेदारी सरपंच पति निभा रहे हैं, जबकि निर्वाचित महिला सरपंच को पीछे रखा गया है।
कानून और संविधान की अवहेलना….
पंचायती राज अधिनियम के अनुसार, चुनी हुई महिला प्रतिनिधि ही सभी निर्णय लेने की अधिकारी होती है, लेकिन यहां प्रॉक्सी नेतृत्व (Proxy Leadership) का आलम यह है कि महिलाएं नाममात्र की सरपंच बनकर रह गई हैं।
प्रशासन बना मूकदर्शक…
स्थानीय लोगों ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई की गई है और न ही कोई चेतावनी दी गई है। इससे ऐसे “सरपंच पतियों” का हौसला और बढ़ता जा रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल नियम विरोधी है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने की प्रक्रिया को भी कमजोर कर रही है। यदि समय रहते ऐसी दखलंदाजी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो ग्राम स्तर पर लोकतंत्र और जवाबदेही दोनों ही कमजोर हो जाएंगे



