डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अब ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को विस्तार देते हुए सरकार ने अब “एक बगिया मां के नाम” उपयोजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य स्व सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों को फलोद्यान लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे उन्हें सतत आजीविका का साधन मिल सके। इस उपयोजना के अंतर्गत वे महिलाएं लाभान्वित हो सकेंगी जिनके पास आधा एकड़ से एक एकड़ तक की भूमि उपलब्ध है। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 100 फलदार पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी देखरेख, सिंचाई, सुरक्षा एवं पोषण के लिए तीन वर्षों तक की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
परियोजना की लागत 2 लाख 84 हजार रुपये प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। पौधे, खाद, कीटनाशक और श्रमिक मजदूरी की राशि सीधे हितग्राही के खाते में स्थानांतरित की जाएगी। पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की बाड़ और जल आपूर्ति के लिए 50,000 लीटर क्षमता का जलकुंड भी निर्माण कराया जाएगा। परियोजना में टेक्नोलॉजी का भी उपयोग होगा। “सिपरी” एप के माध्यम से भूमि की उपयुक्तता जांची जाएगी और उपयुक्त पौध प्रजातियों का चयन किया जाएगा। आजीविका मिशन की सहायता से 25 एकड़ क्षेत्र के लिए कृषि सखी की नियुक्ति की जाएगी, जो तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगी। 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच वृक्षारोपण का कार्य किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में कम से कम 100 लाभार्थियों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।



