डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। इन दिनों डिंडौरी जिले के ग्राम पंचायतों के विकास हेतु भेजी जा रही पांचवें और 15वें वित्त आयोग की राशि अब सरपंच-सचिव की निजी संपत्ति में बदलती दिख रही है। विकास योजनाओं के नाम पर जारी करोड़ों की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।जिससे ग्रामीण क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदुमेर मोहतरा का आया है जहां सरपंच—सचिव की जोड़ी के द्वारा किए गए भारी वित्तीय अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। बता दें कि सरपंच ओंकार सिंह धुर्वे और सचिव कमल सिंह पट्टा पर आरोप है कि उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त राशि का दुरुपयोग किया है।

सूत्रों के अनुसार, पंचायत में बिना जीएसटी नंबर, धुंधले व अमान्य बिलों के आधार पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया। विशेष रूप से 5वें वित्त आयोग की राशि में ₹2.36 लाख की अमान्य जीएसटी नंबर फर्जी फर्म को भुगतान किया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
भ्रष्टाचार का मामला यहीं नहीं रुक इससे एक कदम आगे बढ़ कर सरपंच—सचिव के द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि में किया गया है। पंचायत के विकास कार्यों हेतु जीपीडीपी (ग्राम पंचायत विकास योजना) के तहत अधिकृत बैंक खाते से खर्च की जानी थी। इसके विपरीत, सरपंच और सचिव ने मिलकर इस राशि को निजी खाते में ट्रांसफर कर भुगतान किया। दस्तावेजों के अनुसार, ₹8,500, ₹30,450, ₹8,500, ₹16,750, ₹50,000, ₹5,000 और ₹9,000 की राशि निजी खाते में स्थानांतरित की गई।
इतना ही नहीं, फोटोकॉपी जैसे सामान्य कार्यों के नाम पर भी मनमाना भुगतान हुआ, जिससे नियमनिकाय व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब मिलीभगत से, अपने चहते फर्मों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके



