28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं शिक्षाविद, शिक्षा सुधार और परीक्षा में गड़बड़ी की जांच की मांग, वजन घटने से स्वास्थ्य बिगड़ा
साईडलुक, डेस्क। जंतर-मंतर पर जारी शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जबकि संबंधित प्रदर्शन 20 जून से जारी है। आंदोलन से जुड़े संगठन राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
हाल के दिनों में वांगचुक के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकीय बुलेटिनों के अनुसार उनका वजन लगातार कम हुआ है और लंबे समय तक उपवास के कारण कमजोरी बढ़ी है। चिकित्सकों ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि लंबे समय तक जारी भूख हड़ताल शरीर के कई अंगों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसी वजह से उनके समर्थकों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं तेज हुई हैं। उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। सार्वजनिक बयानों में कहा गया है कि आंदोलन की भावना महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का जीवन और स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नेताओं ने कहा है कि देश को आपकी जरूरत है और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रह सकता है, लेकिन उसके लिए नेतृत्व का सुरक्षित और स्वस्थ रहना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में शांतिपूर्ण आंदोलनों ने समय-समय पर नीतिगत बहसों को प्रभावित किया है। चाहे वह स्वतंत्रता आंदोलन हो, जेपी आंदोलन, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान या शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े आधुनिक आंदोलन, इन सभी ने लोकतांत्रिक विमर्श को नई दिशा दी है। किसी भी आंदोलन की सफलता अंततः संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और व्यापक जनभागीदारी पर निर्भर करती है।
इस बीच युवाओं के बीच भी आंदोलन को लेकर व्यापक चर्चा देखी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़े विषय लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है।
उधर इंटरनेशनल मीडिया ने भी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर नजर रखी हुई है और इस आंदोलन की कवरेज की जा रही है, जबकि देश की मुख्यधारा मीडिया में इस खबर को लेकर चर्चा कम दिखाई दे रही है, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल भी उठ रहे हैं।

