उप संचालक रश्मि वर्गिस ने गोकलपुर-समनापुर में खेतों और जैव केंद्रों का किया निरीक्षण, पूसा बासमती 1886 के बीज और अरहर मिनीकिट बांटे
साईडलुक, जबलपुर। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में जिले में हुए कार्यों और कृषि विभाग की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का जायजा लेने के लिए संचालनालय किसान कल्याण तथा कृषि विकास भोपाल से उप संचालक रश्मि वर्गिस के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम सोमवार को जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे पर पहुंची। टीम ने ग्राम गोकलपुर और समनापुर में किसानों के खेतों, जैव इनपुट संसाधन केंद्रों और जैव संसाधन इकाइयों का गहन अवलोकन किया।
भ्रमण के दौरान डॉ. रश्मि वर्गिस और उनकी टीम ने ग्राम गोकलपुर में प्रगतिशील कृषक सपना काछी के खेतों और जैव इनपुट संसाधन केंद्र का निरीक्षण किया। टीम ने जीवामृत, घन जीवामृत सहित अन्य प्राकृतिक तकनीकों के प्रयोग और उनके परिणामों का सूक्ष्म मूल्यांकन किया। विशेषज्ञों ने किसानों के साथ संवाद कर प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, उत्पादन लागत में कमी और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद प्राप्त होने के लाभों पर विस्तार से चर्चा की। टीम ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि का सर्वोत्तम माध्यम बताया।
इस अवसर पर आत्मा परियोजना के तहत धान की उन्नत किस्म पूसा बासमती 1886 के प्रक्षेत्र प्रदर्शन के लिए बीज का वितरण किया गया। साथ ही दलहन आत्मनिर्भरता योजना के तहत किसानों को अरहर मिनीकिट भी प्रदान किए गए। विशेषज्ञ टीम ने कृषकों को उनके उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया ताकि उन्हें बाजार में उचित दाम मिल सके।
इसके बाद टीम ने ग्राम समनापुर स्थित कृषक पूरनलाल सैयाम की जैव संसाधन इकाई का भी निरीक्षण किया। उप संचालक सह परियोजना संचालक आत्मा ने स्थानीय अमले को निर्देशित किया कि क्षेत्र के सफल किसानों की सफलता की कहानियों का दस्तावेजीकरण किया जाए जिससे अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
खेत बचाओ अभियान के तहत दी गई जानकारी
खेत बचाओ अभियान के उपलक्ष्य में आयोजित इस भ्रमण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कृषकों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती को अपनाने और कम पानी वाली फसलों के चयन के लिए प्रोत्साहित किया। टीम ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल लागत घटेगी बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहेगी।




