21 हजार किलोमीटर में ही दम तोड़ गई हाइब्रिड कार, पुराना मॉडल थमाने और 5.30 लाख मांगने पर उपभोक्ता फोरम ने माना सेवा में लापरवाही, 45 दिन में E20 वाली नई गाड़ी या 20.50 लाख लौटाने का फरमान
साईडलुक, डेस्क। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी और उसके डीलर को सेवा में भारी लापरवाही का दोषी मानते हुए एक बड़ा और नजीर बनने वाला आदेश दिया है। फोरम ने एक डॉक्टर की खराब हाइब्रिड ग्रैंड विटारा के बदले E20 कंप्लायंट इंजन वाली नई कार देने का निर्देश दिया है।
मामला डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है जिन्होंने जून 2024 में मारुति की प्रीमियम हाइब्रिड एसयूवी ग्रैंड विटारा खरीदी थी। महज 21,913 किलोमीटर चलने के बाद ही कार का इंजन खराबी के कारण बंद हो गया। पीड़ित डॉक्टर जब कार को लेकर डीलर के पास पहुंचे तो कंपनी ने वारंटी में होने के बावजूद कार की मरम्मत के लिए उनसे 5.30 लाख रुपये की मांग कर दी।
डॉक्टर ने इस मनमानी के खिलाफ रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। आयोग द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि कंपनी ने ग्राहक को 2023 का पुराना मॉडल बेचा था जो E20 ईंधन के अनुकूल नहीं था, जबकि देश में अब E20 फ्यूल का चलन है और ग्राहक को नया E20 कंप्लायंट मॉडल मिलना चाहिए था।
फोरम का सख्त आदेश, नई कार दो या पूरा पैसा लौटाओ
मामले को गंभीरता से लेते हुए फोरम ने इसे सेवा में भारी लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। फोरम ने मारुति सुजुकी और उसके डीलर को आदेश दिया है कि वे 45 दिन के भीतर डॉक्टर को E20 कंप्लायंट इंजन वाली नई ग्रैंड विटारा कार देकर उसकी खराब कार बदलें। यदि कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है तो उसे कार की कीमत, रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस सहित कुल 20.50 लाख रुपये ग्राहक को लौटाने होंगे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 1.10 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
मारुति सुजुकी ने दी सफाई
उधर इस फैसले पर मारुति सुजुकी ने भी अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा है कि वह रायपुर उपभोक्ता फोरम के इस आदेश से अवगत है। कंपनी का दावा है कि विवादित कार पूरी तरह से E20 कंपैटिबल थी और उसमें E20 फ्यूल का इस्तेमाल किया जा सकता था, जिसका उल्लेख गाड़ी के ओनर मैनुअल में भी किया गया था। फिलहाल उपभोक्ता फोरम के इस फैसले ने ऑटो सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है और इसे ग्राहकों के अधिकारों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

