सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत, हफ्ते में दो बार डायलिसिस पर टिका जीवन, कहा नई जिंदगी दीजिए या मरने की इजाजत, जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं
साईडलुक, डेस्क। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए गई पांच महिलाओं की जिंदगी आज डायलिसिस मशीन के सहारे टिकी हुई है। अपनी इस पीड़ा से तंग आकर इन पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। महिलाओं ने अपने पत्र में लिखा है कि हमें नई जिंदगी दीजिए या फिर इच्छामृत्यु की अनुमति दीजिए।
इन महिलाओं का कहना है कि वे अपने बच्चों को जन्म देने के लिए अस्पताल गई थीं लेकिन प्रसव के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और आज उनकी जिंदगी हफ्ते में दो बार होने वाली डायलिसिस के भरोसे रह गई है। इन्हीं में से एक पीड़िता धन्ली सुमन ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि डायलिसिस के सहारे हम पांच से छह महीने तक ही जी पाएंगे। इसलिए सरकार या तो हमारी किडनी ट्रांसप्लांट करवाए या हमें इच्छामृत्यु की अनुमति दे।
प्रदेश के कई जिलों से आ रहे हैं ऐसे मामले, जांच रिपोर्ट का इंतजार
बताया जा रहा है कि राजस्थान के अलग अलग जिलों में ऑपरेशन के जरिए बच्चों को जन्म देने के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन मामलों को लेकर जो जांच कराई गई है उसकी रिपोर्ट खबर लिखे जाने तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले पर जहां सरकार अपने तर्क दे रही है वहीं विपक्ष ने सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता के अहंकार में डूबी भाजपा सरकार ने समय रहते विपक्ष और पीड़ितों की आवाज सुनी होती तो आज यह शर्मनाक नौबत नहीं आती। आज हालात यह है कि मजबूर पीड़िताओं को राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु मांगनी पड़ रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

