विपक्ष ने उठाए शिक्षा, किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दे, सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
साईडलुक, डेस्क। संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा से जुड़े विवाद, एथेनॉल नीति, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की। इन मुद्दों को लेकर दोनों सदनों में लगातार हंगामा हुआ, जिसके कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई और अंततः निर्धारित समय से पहले स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष का आरोप रहा कि देश के लाखों छात्रों, किसानों और युवाओं से जुड़े गंभीर प्रश्नों पर सरकार विस्तृत चर्चा से बच रही है। विपक्षी सांसदों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, कृषि नीतियों और रोजगार जैसे विषयों पर संसद में खुली बहस लोकतंत्र की मूल भावना है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण विषयों पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन सदन में लगातार हंगामे के कारण चर्चा का वातावरण नहीं बन पा रहा है।
NEET परीक्षा को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और अभ्यर्थियों के भविष्य का मुद्दा उठाया। देशभर में लगभग 24 लाख अभ्यर्थियों द्वारा दी जाने वाली इस परीक्षा से हर वर्ष लाखों परिवारों की उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। विपक्षी सांसदों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए व्यापक सुधारों और जवाबदेही की आवश्यकता है।
संसद में एथेनॉल नीति भी प्रमुख मुद्दा बनी रही। विपक्ष ने खाद्यान्न आधारित एथेनॉल उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय के बीच संतुलन पर सवाल उठाए। सरकार का पक्ष है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, प्रदूषण नियंत्रण तथा किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। सरकार ने पहले भी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है और इसके लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं।
इसी दौरान दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मुद्दा भी संसद के भीतर जोरदार ढंग से उठाया गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है और कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार की गई।
महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय, शिक्षा बजट, सार्वजनिक स्वास्थ्य, राज्यों के वित्तीय अधिकार तथा अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। विपक्ष का कहना था कि संसद का प्राथमिक उद्देश्य जनता से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा और समाधान निकालना है। दूसरी ओर सरकार ने दावा किया कि वह विकास, आर्थिक वृद्धि, आधारभूत संरचना, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर लगातार काम कर रही है तथा सदन में सार्थक चर्चा के लिए तैयार है।
संसदीय कार्यवाही के दौरान बार-बार हुए व्यवधान के कारण कई विधायी और अन्य निर्धारित कार्य प्रभावित हुए। संसदीय मामलों के जानकारों का मानना है कि लोकतंत्र में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है जहां सरकार और विपक्ष के बीच तथ्यों, नीतियों और जनहित के मुद्दों पर विस्तृत बहस होनी चाहिए। लगातार स्थगन से न केवल विधायी कार्य प्रभावित होता है बल्कि जनता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा भी अधूरी रह जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, महंगाई और युवाओं से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगामी बैठकों में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या नहीं तथा क्या इन मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा हो पाती है।

