एआईसी अधिकारियों ने समझाई योजना की बारीकियां, धान सिंचित के लिए 358 रुपये प्रति एकड़ प्रीमियम तय, केसीसी किसानों को 29 जुलाई तक फसल सुधार कराने की हिदायत
साईडलुक, जबलपुर। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा विकासखंड पाटन के ग्राम मादा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को उनकी फसलों का बीमा कराने के लिए प्रेरित करना और योजना की विस्तृत जानकारी देना था।
कार्यशाला में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी यानी एआईसी के क्षेत्रीय अधिकारी नितिन पटेल और आयुष ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ, पंजीयन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत किसान अपनी खरीफ फसल का बीमा 31 जुलाई तक करा सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऋणी और अऋणी दोनों श्रेणी के किसान यानी बटाईदार और काश्तकार भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
अऋणी किसानों को आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, खसरा खतौनी यानी भू अधिकार पुस्तिका और सत्यापित बुआई प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। किसानों को यह भी बताया गया कि वे किसान सेवा सहकारी समिति, बैंक शाखा, कॉमन सर्विस सेंटर, फसल बीमा पोर्टल या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं।
फसलों के लिए प्रीमियम दरें तय
कार्यशाला के दौरान खरीफ फसलों के लिए तय प्रीमियम दरों की जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धान सिंचित के लिए 358 रुपये प्रति एकड़, धान असिंचित के लिए 252 रुपये प्रति एकड़, मक्का के लिए 248 रुपये प्रति एकड़ और उड़द के लिए 231 रुपये प्रति एकड़ प्रीमियम निर्धारित किया गया है।
इस अवसर पर अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की केसीसी के माध्यम से फसल बीमा योजना की राशि कटती है यदि उन किसानों द्वारा बैंक में पंजीकृत फसल की जगह कोई अन्य फसल बोई गई है तो ऐसी स्थिति में उन्हें 29 जुलाई से पहले अपने बैंक में जाकर फसल का सुधार करा लेना चाहिए ताकि भविष्य में फसल हानि होने पर बीमा का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कार्यशाला में ऐसे किसान भी मौजूद थे जो पूर्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ले चुके हैं। उन्होंने वहां मौजूद अन्य किसानों को भी अपनी फसल का बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित किया। इस कार्यशाला में पाटन विकासखंड के सभी कृषि विस्तार अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे। अंत में कृषि अधिकारियों और बीमा कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारियों ने सभी किसानों से अंतिम तिथि से पहले अपनी खरीफ फसलों का बीमा अवश्य कराने की अपील की।



