ओडीएफ प्लस गांव यानी की ऐसा गांव जहां खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी हो और ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय हो, इसके साथ ही गांव के सभी घरों के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घर और आंगनवाड़ी केंद्र में शौचालय की सुविधा होना जरूरी है।
डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| ओडीएफ प्लस गांव यानी की ऐसा गांव जहां खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी हो और ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय हो, इसके साथ ही गांव के सभी घरों के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घर और आंगनवाड़ी केंद्र में शौचालय की सुविधा हो। वहीं सभी सार्वजनिक स्थानों और कम से कम 80 फीसदी घरों में अपने ठोस और तरल कचरे का प्रभावी ढंग से प्रबंधन हो। इतना ही नहीं, स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र पर छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय उपलब्ध हो, किसी भी सामूहिक जगहों पर जैविक या अजैविक कूड़ा या नाले में पानी इकट्ठा न हो और गांव में कूड़ा निस्तारण के लिए कूड़ेदान या गड्ढे बने हो। लेकिन वही डिंडौरी जनपद पंचायत की अधिकांश ग्राम पंचायतों के पास ओडीएफ प्लस का दर्जा है और ग्रामों के सामुदायिक स्वछता परिसरों में ताला लटके हुए और लोग खुले में शौच जा रहे, फिर भी ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया है जिससे देखकर कहे सकते है कि गजब का ओडीएफ प्लस है ?
खास बात यह कि जिले के डिंडौरी जनपद पंचायत क्षेत्रों में आने वाली अधिकांश ग्राम पंचायतों को जिला प्रशासन द्वारा ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया, जिससे यह साफ हो जाता पता है कि जिले भर की अधिकांश ग्राम पंचायते पुरी तरह से स्वछता यानी खुुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी (ओडीएफ प्लस)की ओर अग्रसर हो चुकी है अब उन ग्राम पंचायतों में के हर घर में शौचालय हो चुके है सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक स्वछता परिसर बन चुके है लोग खुले मे न जाकर शौचालयों का उपयोग कर रहे है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

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ओडीएफ प्लस गांव यानी की ऐसा गांव जहां खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी हो और ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय हो, इसके साथ ही गांव के सभी घरों के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घर और आंगनवाड़ी केंद्र में शौचालय की सुविधा होना जरूरी है।डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| ओडीएफ प्लस गांव यानी की ऐसा गांव जहां खुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी हो और ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक शौचालय हो, इसके साथ ही गांव के सभी घरों के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घर और आंगनवाड़ी केंद्र में शौचालय की सुविधा हो। वहीं सभी सार्वजनिक स्थानों और कम से कम 80 फीसदी घरों में अपने ठोस और तरल कचरे का प्रभावी ढंग से प्रबंधन हो। इतना ही नहीं, स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र पर छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय उपलब्ध हो, किसी भी सामूहिक जगहों पर जैविक या अजैविक कूड़ा या नाले में पानी इकट्ठा न हो और गांव में कूड़ा निस्तारण के लिए कूड़ेदान या गड्ढे बने हो। लेकिन वही डिंडौरी जनपद पंचायत की अधिकांश ग्राम पंचायतों के पास ओडीएफ प्लस का दर्जा है और ग्रामों के सामुदायिक स्वछता परिसरों में ताला लटके हुए और लोग खुले में शौच जा रहे, फिर भी ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया है जिससे देखकर कहे सकते है कि गजब का ओडीएफ प्लस है ?खास बात यह कि जिले के डिंडौरी जनपद पंचायत क्षेत्रों में आने वाली अधिकांश ग्राम पंचायतों को जिला प्रशासन द्वारा ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया, जिससे यह साफ हो जाता पता है कि जिले भर की अधिकांश ग्राम पंचायते पुरी तरह से स्वछता यानी खुुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी (ओडीएफ प्लस)की ओर अग्रसर हो चुकी है अब उन ग्राम पंचायतों में के हर घर में शौचालय हो चुके है सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक स्वछता परिसर बन चुके है लोग खुले मे न जाकर शौचालयों का उपयोग कर रहे है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।दरअसल जनपद पंचायत डिंडौरी के ग्राम पंचायत इमलई माल को ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया हैं। लेकिन खुुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी (ओडीएफ प्लस) यह कागजों में और ग्राम पंचायतों के बाहर लगे सूचाना पटल में ही चल रहा है बता दे कि ग्राम पंचायत इमलई माल के ग्रामीणोें के घर में बने शौचालय पूरी तरह जर्जर हो गई, या फिर निर्माण के शौचालय में सीट तक नहीं लगाया गया। वहीं ग्राम पंचायत भवन के पास बने सामुदायिक शौचालय में पूर्ण सुविधा न होने के वजह से कभी उपयोग ही नहीं किया गया। जिसे जिल प्रशासन के जिम्मेंदारों के ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया है बता दे कि ऐसी ही अधिकांश ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों में या तो ताले लटके है या फिर कही पर अधूरे है या फिर कही पर अनुपयोगी हो चुके है, कुल मिलकर जिले भर में यह योजना फेल साबित होती नजर आ रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे प्रदेश भर में लोगो के लिए खुले में शौच करने न जाए इसके लिए पहले हितग्राही मुलक शौचालय बनाए गए 12 हजार रू. देकर शौचालय बनाए गए , फिर उसके बाद करीब तीन वर्ष पूर्व फिर से सामुदायिक शौचालय प्रत्येक ग्राम पंचायतों में 3.43 लाख रू. की लागत से बनाए गए, लेकिन जिले के ग्राम पंचायतों में बने अधिंकाश सामुदायिक शौचालय शोपीस ही सबित हो रही है क्योकि अभी तक इनका उपयोग नही किया जा रहा है या फिर अभी अधूरे निर्माण की वजह से उपयोग मे नहीं आ रहे है। वही जिला प्रशासन के द्वारा इनमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया है इसका मतलब अब ये ग्राम पंचायते खुले में शौच मुक्त हो चुकी हैं। लेकिन सिर्फ कागजों गजब है।अधूरे पड़े सामुदायिक शौचालयः-जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय अधूरे निर्माण कार्य के कारण अनुपयोगी साबित हो रहे है। कही समुदायिक शौचालय बने भी है तो उनमें या तो ताले लटके हुए है या फिर कही पानी का कनेक्शन नहीं है या फिर कही अभी तक टेंक नही बनाए गए इसके अलाव कही अभी सामुदयिक शौचालय पूर्ण नहीं हुए है फिर भी विभाग द्वारा उनको ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया है । वही ग्राम पंचायतो द्वारा इन कार्यो को पूर्ण बता दिया गया हैशौचालय हुए जर्जर-वही जिला प्रशासन द्वारा इन ग्राम पंचायतो को ओडीएफ प्लस का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन सही मानिटरिंग नहीं की गई है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्राम पंचायतों में जहां सामुदायिक शौचलायों में ताले लटके हुए है वही इन्ही ग्राम पंचायतों के अधिकांश हितग्राही मूलक शौचालय या तो जर्जर हो चुके है या फिर किसी शौचालय मे शीट तक नहीं लगाई गई है सिर्फ कागजो में ही शौचालयों को पूर्ण बता दिया गया है।
दरअसल जनपद पंचायत डिंडौरी के ग्राम पंचायत इमलई माल को ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया हैं। लेकिन खुुले में शौच पर पूर्ण पाबंदी (ओडीएफ प्लस) यह कागजों में और ग्राम पंचायतों के बाहर लगे सूचाना पटल में ही चल रहा है बता दे कि ग्राम पंचायत इमलई माल के ग्रामीणोें के घर में बने शौचालय पूरी तरह जर्जर हो गई, या फिर निर्माण के शौचालय में सीट तक नहीं लगाया गया। वहीं ग्राम पंचायत भवन के पास बने सामुदायिक शौचालय में पूर्ण सुविधा न होने के वजह से कभी उपयोग ही नहीं किया गया। जिसे जिल प्रशासन के जिम्मेंदारों के ओडीएफ प्लस का दर्जा दिया गया है बता दे कि ऐसी ही अधिकांश ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों में या तो ताले लटके है या फिर कही पर अधूरे है या फिर कही पर अनुपयोगी हो चुके है, कुल मिलकर जिले भर में यह योजना फेल साबित होती नजर आ रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे प्रदेश भर में लोगो के लिए खुले में शौच करने न जाए इसके लिए पहले हितग्राही मुलक शौचालय बनाए गए 12 हजार रू. देकर शौचालय बनाए गए , फिर उसके बाद करीब तीन वर्ष पूर्व फिर से सामुदायिक शौचालय प्रत्येक ग्राम पंचायतों में 3.43 लाख रू. की लागत से बनाए गए, लेकिन जिले के ग्राम पंचायतों में बने अधिंकाश सामुदायिक शौचालय शोपीस ही सबित हो रही है क्योकि अभी तक इनका उपयोग नही किया जा रहा है या फिर अभी अधूरे निर्माण की वजह से उपयोग मे नहीं आ रहे है। वही जिला प्रशासन के द्वारा इनमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया है इसका मतलब अब ये ग्राम पंचायते खुले में शौच मुक्त हो चुकी हैं। लेकिन सिर्फ कागजों गजब है।

अधूरे पड़े सामुदायिक शौचालयः-
जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय अधूरे निर्माण कार्य के कारण अनुपयोगी साबित हो रहे है। कही समुदायिक शौचालय बने भी है तो उनमें या तो ताले लटके हुए है या फिर कही पानी का कनेक्शन नहीं है या फिर कही अभी तक टेंक नही बनाए गए इसके अलाव कही अभी सामुदयिक शौचालय पूर्ण नहीं हुए है फिर भी विभाग द्वारा उनको ओडीएफ प्लस का दर्जा दे दिया गया है । वही ग्राम पंचायतो द्वारा इन कार्यो को पूर्ण बता दिया गया है
शौचालय हुए जर्जर-
वही जिला प्रशासन द्वारा इन ग्राम पंचायतो को ओडीएफ प्लस का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन सही मानिटरिंग नहीं की गई है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्राम पंचायतों में जहां सामुदायिक शौचलायों में ताले लटके हुए है वही इन्ही ग्राम पंचायतों के अधिकांश हितग्राही मूलक शौचालय या तो जर्जर हो चुके है या फिर किसी शौचालय मे शीट तक नहीं लगाई गई है सिर्फ कागजो में ही शौचालयों को पूर्ण बता दिया गया है।


