तीन दौर की वार्ता के बाद खत्म हुआ लंबा धरना, शिक्षा सुधारों पर भी आगे संवाद जारी रखने का आश्वासन
साईडलुक, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह से चल रहा CJP (Cockroach Janta Party) का छात्र-युवा आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। आंदोलन समाप्त करने की घोषणा CJP नेतृत्व ने केंद्र सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद की। संगठन का कहना है कि उसकी तीन प्रमुख मांगों पर सरकार ने सहमति जताई है, जिसके बाद “सद्भावना के आधार पर” आंदोलन वापस लिया जा रहा है। सरकार और CJP के बीच हुई संयुक्त वार्ता में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सुधारों पर आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
इस आंदोलन की शुरुआत राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर उठे सवालों के बीच हुई थी। आंदोलन के दौरान देश के कई राज्यों में प्रदर्शन हुए, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार जुटे रहे। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव तथा कई मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद आंदोलन और तेज हो गया था।
CJP के अनुसार, सरकार ने उसकी पहली प्रमुख मांग के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलनकारियों की इस मांग को पूरा माना। दूसरी प्रमुख मांग के रूप में प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों तथा एफआईआर वापस लेने पर सहमति बनी। तीसरी मांग के संबंध में आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों को नियमों के अनुरूप सम्मानजनक आर्थिक सहायता (मुआवजा) उपलब्ध कराने पर भी सरकार ने सकारात्मक आश्वासन दिया। संगठन ने कहा कि इन आश्वासनों के आधार पर धरना समाप्त किया जा रहा है और अब सरकार से तय समयसीमा में इन निर्णयों के क्रियान्वयन की अपेक्षा की जाएगी।
सरकार की ओर से हुई वार्ता में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल रहे। बैठक के दौरान CJP ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा क्षेत्र में सुधार से संबंधित पाँच सूत्रीय सुझाव भी सरकार को सौंपे। सरकार ने इन सुझावों का अध्ययन करने तथा निकट भविष्य में संगठन के प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक कर शिक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
आंदोलन समाप्त होने की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक स्थल खाली करना शुरू कर दिया। कई दिनों से धरनास्थल पर डटे छात्र अपने-अपने राज्यों की ओर लौटते दिखाई दिए। CJP नेतृत्व ने कहा कि आंदोलन फिलहाल समाप्त किया जा रहा है, लेकिन यदि सहमति के अनुरूप फैसलों का पालन नहीं हुआ तो भविष्य की रणनीति पर फिर विचार किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम हाल के वर्षों के सबसे चर्चित छात्र आंदोलनों में से एक का महत्वपूर्ण पड़ाव है। आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार वार्ता में किए गए आश्वासनों को किस समयसीमा में लागू करती है और प्रस्तावित शिक्षा सुधारों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

