डिंडौरी(रामसहाय मर्दन)| प्रदेश सरकार नागरिकों को अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देेने के दावे कर रही है लेकिन हकीकत कुछ और है। हालत ये है कि इन अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं है। मरीजों को अस्पताल के बाहर से दवा लेनी पड़ रही हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में पिछले कई दिनों से दवाइयों की किल्लत है। ऐसे में इलाज के लिए आने वाले मरीज बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। हाल यह है कि यहां करीब 373 प्रकार की दवाइयों की सप्लाई होती है। इसमें से करीब 66 से भी अधिक प्रकार की दवाएं यहां नहीं हैं।
सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में उपचार व दवाइयां नि:शुल्क दिए जाने का प्रावधान है। सरकारी चिकित्सकों के द्वारा पर्ची में लिखे गए दवा जिला अस्पताल में मिलनी चाहिए लेकिन जिला अस्पताल में सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल रही है जो दवाइयां जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क मिलनी चाहिए वह मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिससे मजबूरी में मरीजों को बाहर से पैसा देकर महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही हैं।
अब सवाल यह कि डिंडौरी जिले का इकलौता जिला चिकित्सालय में दवाओं का अभाव है तो मरीजों का कैसे इलाज होगा? क्या मरीज इसी तरह दवाइयों के लिए भटकते रहेंगे? यह सबसे बड़ी चुनौती बना है। जिन्हें सामान्य बीमारियों की दवा भी बाहर से खरीदनी पड़ रही है। ऐसा ही मामला विगत दिन बुधवार को सामने आया है पीड़ित को हांथ के कलाई में हल्का मोच आने के कारण जिला चिकित्सालय में उपचार कराने के लिए गया था। पीड़ित ने बताया कि ओपीडी पर्ची कटाकर चिकित्सक के पास गया था उन्होंने दवाइंया लिख दिया। जब मरीज मेडिसीन में लेना मेडिसन काउंटर पर गया तो तीन टेबलेट में से एक टेबलेट देकर बाकी दो दवाइयां उपलब्ध नहीं है बाहर से खरीदने की बात कह कर भागा दिया गया।
जब दवाइयों के कमी के संबंध में जिला चिकित्सालय (CMHO) सीएमएचओ रमेश मरावी से बात की गई तो उन्होंने कहा जिला चिकित्सालय में सभी दवाइयां उपलब्ध है लेकिन सवाल ये उठता है कि जब सभी दवाइयां जिला चिकित्सालय में उपलब्ध है तो मरीजों को क्यों नहीं दिया जा रहा है? मरीजों को बाहर से महंगे दामों में दवाइयां क्यों खरीदनी पड़ रही है।
कहना है :― रमेश मरावी(CMHO) जिला चिकित्सालय डिंडौरी
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डिंडौरी(रामसहाय मर्दन)| प्रदेश सरकार नागरिकों को अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देेने के दावे कर रही है लेकिन हकीकत कुछ और है। हालत ये है कि इन अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं तक नहीं है। मरीजों को अस्पताल के बाहर से दवा लेनी पड़ रही हैं।मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में पिछले कई दिनों से दवाइयों की किल्लत है। ऐसे में इलाज के लिए आने वाले मरीज बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। हाल यह है कि यहां करीब 373 प्रकार की दवाइयों की सप्लाई होती है। इसमें से करीब 66 से भी अधिक प्रकार की दवाएं यहां नहीं हैं।सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में उपचार व दवाइयां नि:शुल्क दिए जाने का प्रावधान है। सरकारी चिकित्सकों के द्वारा पर्ची में लिखे गए दवा जिला अस्पताल में मिलनी चाहिए लेकिन जिला अस्पताल में सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल रही है जो दवाइयां जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क मिलनी चाहिए वह मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिससे मजबूरी में मरीजों को बाहर से पैसा देकर महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही हैं।अब सवाल यह कि डिंडौरी जिले का इकलौता जिला चिकित्सालय में दवाओं का अभाव है तो मरीजों का कैसे इलाज होगा? क्या मरीज इसी तरह दवाइयों के लिए भटकते रहेंगे? यह सबसे बड़ी चुनौती बना है। जिन्हें सामान्य बीमारियों की दवा भी बाहर से खरीदनी पड़ रही है। ऐसा ही मामला विगत दिन बुधवार को सामने आया है पीड़ित को हांथ के कलाई में हल्का मोच आने के कारण जिला चिकित्सालय में उपचार कराने के लिए गया था। पीड़ित ने बताया कि ओपीडी पर्ची कटाकर चिकित्सक के पास गया था उन्होंने दवाइंया लिख दिया। जब मरीज मेडिसीन में लेना मेडिसन काउंटर पर गया तो तीन टेबलेट में से एक टेबलेट देकर बाकी दो दवाइयां उपलब्ध नहीं है बाहर से खरीदने की बात कह कर भागा दिया गया।जब दवाइयों के कमी के संबंध में जिला चिकित्सालय (CMHO) सीएमएचओ रमेश मरावी से बात की गई तो उन्होंने कहा जिला चिकित्सालय में सभी दवाइयां उपलब्ध है लेकिन सवाल ये उठता है कि जब सभी दवाइयां जिला चिकित्सालय में उपलब्ध है तो मरीजों को क्यों नहीं दिया जा रहा है? मरीजों को बाहर से महंगे दामों में दवाइयां क्यों खरीदनी पड़ रही है।कहना है :― रमेश मरावी(CMHO) जिला चिकित्सालय डिंडौरी

