अधिवक्ता सम्यक् जैन,मनन अग्रवाल एवं धीरज तिवारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने पारित किया आदेश….

नर्मदा में फैल रहे प्रदूषण एवं मिल रहे गंदे नालों को रोकने दर्ज कराई थी याचिका….

डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| डिंडौरी में सीवरेज के दूषित जल, मल से प्रदूषित हो रही माँ नर्मदा के संरक्षण को लेकर शासन प्रशासन उदासीन हैं, मामले को लेकर युवा अधिवक्ता सम्यक जैन और मनन अग्रवाल ने एनजीटी में मामला दर्ज कर ठोस उपाय करने की मांग किया था, 25 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय पीठ भोपाल ने जिम्मेदारों के लापरवाह रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। नर्मदा नदी में अशोधित सीवेज की रिहाई को रोकने में विफल रहने पर, नर्मदा विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन सहित कलेक्टर व मुख्य नगर पालिका अधिकारी को एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने 04/10/23 को प्राधिकरण में पेश होने का आदेश पारित किया है। एनजीटी के समक्ष दायर याचिका में नर्मदा नदी में अनुपचारित सीवेज को रोकने में विफल रहने के लिए मध्यप्रदेश सरकार और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

एनजीटी द्वारा पारित आदेश दिनांक 25/08/23 में कहा कि जिम्मेदारों के द्वारा गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा है एवं जल प्रदूषित हो रहा है, जो जल (रोकथाम और नियंत्रण) की धारा 24 व जल अधिनियम 1974 की धारा 43 के तहत दंडनीय है।न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल व डॉ अफ़रोज़ अहमद की पीठ ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन सहित मामले में सख्त कार्रवाई करने से पहले, सभी संबंधित पक्षों को एक अवसर दिया है जिस तारतम्य में वाइस चेयरमैन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, भोपाल, कलेक्टर डिंडौरी और मुख्य नगर पालिका अधिकारी, डिंडौरी को 04.10.2023 को इस न्यायाधिकरण (एनजीटी) के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया हैं। अधिवक्ता सम्यक् जैन ने मामले की स्वयं पैरवी की।

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