मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की खंडपीठ ने दिए समयबद्ध चुनाव के निर्देश, 2017 से लंबित थी प्रक्रिया, NSUI ने फैसले का किया स्वागत
साईडलुक, जबलपुर। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नौ वर्षों से टल रहे छात्रसंघ चुनावों का रास्ता अब साफ हो गया है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ में सोमवार को हुई अहम सुनवाई के बाद राज्य शासन ने अदालत को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर जारी कर दिया है जिसमें सितंबर 2026 में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया पूरी कराने का प्रावधान किया गया है।
यह सुनवाई छात्र नेता अदनान अंसारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर हुई जो वर्ष 2024 से न्यायालय में लंबित थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अक्षरदीप ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय को बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से एक भी बार छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं जिससे लाखों विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। पूर्व की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने सरकार के केवल आश्वासनों पर असंतोष जताते हुए स्पष्ट समय सीमा और ठोस कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने पेश किया अकादमिक कैलेंडर, कोर्ट ने दिया अंतिम निर्देश
सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत उत्तर को अभिलेख पर लेते हुए खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जारी अकादमिक कैलेंडर के अनुरूप सितंबर 2026 में छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया हर हाल में सुनिश्चित की जाए। न्यायालय ने इसी के साथ वर्ष 2024 से लंबित जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
सुनवाई के दौरान प्रदेश के समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय से आग्रह किया कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार पुलिस और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराए। इस पर खंडपीठ ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य और विश्वविद्यालयों के कुलगुरु पुलिस और जिला प्रशासन से सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
कोरोना के बाद से टल रहे थे चुनाव, लाखों छात्रों को मिलेगा प्रतिनिधित्व
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2017 के बाद से नहीं हुए हैं। राज्य सरकार ने बीच में कोरोना महामारी और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर चुनावों को लगातार स्थगित रखा था। इससे कैंपस में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। अब उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश और उच्च शिक्षा विभाग के नए अकादमिक कैलेंडर के बाद सितंबर में चुनाव का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसे प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
NSUI ने फैसले का किया स्वागत, इसे बताया छात्र शक्ति की जीत
उच्च न्यायालय के आदेश और सरकार द्वारा चुनाव की समय सीमा घोषित किए जाने के बाद छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रसन्नता व्यक्त की है। एनएसयूआई के छात्र नेता शफी खान और एजाज अंसारी ने कहा कि लगभग नौ साल के लंबे इंतजार के बाद छात्रों को न्याय मिला है। यह निर्णय छात्र हितों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ छात्रों की आवाज होते हैं और अब उन्हें अपनी समस्याओं को मंच पर रखने और कैंपस में लोकतांत्रिक भागीदारी का अवसर मिलेगा।
संगठन ने इस लड़ाई को मजबूती से लड़ने के लिए याचिकाकर्ता अदनान अंसारी और अधिवक्ता अक्षरदीप के प्रयासों की सराहना की है। साथ ही उच्च न्यायालय का आभार व्यक्त किया है। एनएसयूआई ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सितंबर 2026 में घोषित समय सीमा के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं और चुनाव के दौरान छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल के लिए पर्याप्त पुलिस और प्रशासनिक इंतजाम किए जाएं।

