डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि शिक्षकों को केवल शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित रखा जाए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। लेकिन इन निर्देशों को दरकिनार करते हुए डिंडौरी जिले में बड़े पैमाने पर शिक्षकों को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

दिनांक 4 जून 2015 को स्कूल शिक्षा विभाग, बल्लभ भवन भोपाल द्वारा सभी संभागायुक्तों एवं कलेक्टरों को आदेश जारी कर यह स्पष्ट कहा गया था कि शिक्षकों को बीएलओ कार्य से मुक्त रखा जाए तथा यह कार्य रोजगार सहायक, पंचायत सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कराया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। डिंडौरी जिले में आधे से अधिक शिक्षकों को बीएलओ बना दिया गया है, वहीं सभी प्राचार्य को सुपरवाइजर एवं मास्टर ट्रेनर की जिम्मेदारी दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि शैक्षणिक कार्यदिवसों में ही प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं और शिक्षकों को घर-घर जाकर बीएलओ का कार्य करने को कहा जा रहा है। इससे विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शिक्षा विभाग के अपने ही आदेशों की अनदेखी से शासन की “बेहतर शिक्षा व्यवस्था” की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

वहीं शिक्षकों में नाराजगी शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ शासन गुणवत्ता शिक्षा की बात करता है, दूसरी तरफ हमें गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाया जा रहा है। इससे पढ़ाई की निरंतरता टूट रही है और छात्रों का भविष्य खतरे में है। अब सवाल यह उठता है: जब शासन के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तो फिर इनका पालन क्यों नहीं हो रहा? क्या शिक्षा को फिर से चुनाव और प्रशासनिक कार्यों की बलि चढ़ा दिया जाएगा?



