जबलपुर नवनीत दुबे- शीर्षक पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि कर्तव्यनिष्ठ खाकी धारी निश्चित है किसी को ख्यात गैंगेस्टर के किसी घर में छुपे होने की सूचना पर दल बल के साथ दबिश देने गया होगा और मौके से कुख्यात अपराधी को पकड़ने में सफलता हासिल की होगी, यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपका अनुमान बिल्कुल गलत है अब सिलसिलेवार इस घटनाक्रम के उल्लेख से वास्तविकता को प्रदर्शित किया जा रहा है, आधुनिक तकनीक से भली-भांति परिपूर्ण पुलिसकर्मी रात्रि 3:00 बजे कोतवाली थाना क्षेत्र के स्टेट बैंक कॉलोनी में पहुंचते हैं किसी लापता लड़की की तलाश में जो किसी युवक के साथ प्रेम प्रसंग के चलते घर से भागी थी ऐसी आशंका है ? परिजनों द्वारा इसकी शिकायत गोहलपुर थाने में की गई थी बस फिर क्या था सजग और तत्पर पुलिसकर्मी प्रेमी युगल की खोजबीन में जुट गए विडंबना कहें यहां हास्यदपड की युवती के मोबाइल की लोकेशन स्टेट बैंक कॉलोनी क्षेत्र की आ रही थी जिसके मद्देनजर उप निरीक्षक समेत चार से पांच पुलिसकर्मी कॉलोनी के रहवासियों का रात्रि 3:00 बजे पुलिसिया अंदाज में दरवाजा खटखटाने लगे और रोप का प्रदर्शन करते हुए सभी घरों में घुसकर तलाशी लेने लगे इस तरह रात में पुलिस वालों का घर में घुसकर तलाशी लेने का जब घर के लोगों ने विरोध किया तो खाकी धारी पुलिसिया भाषा शैली का प्रयोग कर कानून का भय दिखाने लगे जिसके चलते घरों में मौजूद महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे, सहमे खड़े रहे, आखिरकार पुलिस की सजगता कर्तव्यनिष्ठा के परिणाम स्वरूप लापता युवती किसी भी घर में नहीं मिली और पुलिसकर्मी एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आए हास्यास्पद ही कहेंगे कि तकनीकी ज्ञान में खुद को निपुण समझने वाले यह पुलिसकर्मी जो रात्रि 3:00 बजे लोकेशन की बात करके 11 घरों में घुसे जिससे सभ्रांत लोगों का रक्तचाप बढ़ गया, और उन पुलिसकर्मियों के तकनीकी ज्ञान में कमी का अभाव देखने मिला ? अंततः भाई लापता युक्ति दीनदयाल चौक स्थित बस स्टैंड में मिली ऐसा बताया गया मुद्दे की बात यह है कि जिन थानों से पुलिसकर्मी लापता युवती की खोज में रात्रि 3:00 बजे संभ्रांत परिवार के लोगों को नींद से उठा कर घर में घुसे और तलाशी ली यह कानून की किस परिधि में आता है? साथ ही संबंधित थाना क्षेत्र के किसी पुलिसकर्मी विशेषता महिला पुलिसकर्मी के बिना रात में लोगों के घरों में घुसकर तलाशी के नाम पर परेशान करना कहां तक न्यायोचित है, ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आमजन वैसे भी पुलिस के नाम से ही डरा सहमा रहता है लेकिन रसूखदार राजनीतिक लोगों के घरों में घुसकर तलाशी लेने में पुलिस क्यों पीछे हट जाती है ? अंकिता पुलिस के इस तरह के कृत्य से कॉलोनी के रहवासी नाराज हैं और यह भी कह रहे हैं कि जिस तरह रात में पुलिस की वर्दी पहन कर आए वास्तविक पुलिसकर्मी की बजाए अगर कोई लूट के इरादे से पुलिस की वर्दी पहनकर घुसना चाहे तो आसानी से अपने मंसूबों को अंजाम देने में सफल हो जाएगा?

