साईडलुक, जबलपुर। सिहोरा तहसील के सुदूर ग्राम बुधारी में सरपंच ऋतु पांडे ने चार सालों में गांव को पिछड़े इलाके से समृद्ध मुहल्ले में तब्दील कर दिया है। कला स्नातक और पूर्व अतिथि शिक्षक ऋतु ने कृषक परिवार की बहू बनने के बाद राजनीति में कदम रखा और पहली ही कोशिश में सरपंच बनकर विकास की मिसाल कायम की। उनका सफर संकल्प से समाधान तक की जीवंत कहानी बन चुका है।
शिक्षिका से सरपंच: नियति का लिखा खेल
ऋतु पांडे ने इंदौरा पौड़ी और मंडई के माध्यमिक स्कूलों में अतिथि शिक्षिका के रूप में सेवा दी थी। सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाली ऋतु जब बुधारी पहुंचीं, तो पति और परिवार के सहयोग से उन्होंने समाजसेवा को अपनाया। चार साल पहले हुए चुनाव में शानदार जीत हासिल कर उन्होंने गांव को नया जीवन देने का बीड़ा उठाया। आज बुधारी की सड़कें चमक रही हैं और स्वास्थ्य-सेवाएं घर-घर पहुंच रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति: सड़क से पुल तक सब बदला
पदभार संभालते ही ऋतु ने दूरदर्शी प्लान बनाया। ग्राम पंचायत ने सड़कों का जाल बिछाया, नालियां बनवाईं, भव्य पंचायत भवन, पानी की टंकी, बाउंड्री वॉल और मजबूत पुलों का निर्माण कराया। ये बदलाव गांव की जड़ें मजबूत करने वाले हैं, जो बरसों की उपेक्षा को मिटा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले कीचड़ भरी राहें अब गाड़ियां दौड़ा रही हैं।
शिक्षा-स्वास्थ्य-स्वच्छता का त्रिवेणी संगम
ऋतु का मानना है कि गांव की ताकत तीनों में है शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी मजबूत हुईं कि बुधारी अब मॉडल गांव बन गया। स्कूलों में नामांकन बढ़ा, स्वच्छता अभियान चला और अस्पताल जैसी सुविधाएं गांव में उपलब्ध हो गईं। नतीजा? पूरा गांव शिक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ सांस ले रहा है।
नारी शक्ति का संदेश: समर्थन मिले तो रुकावटें पार
ऋतु कहती हैं, “महिलाओं को सही दिशा मिले तो वे समाज को नई ऊंचाइयां देंगी।” उनका संघर्ष साबित करता है कि नारी सशक्तिकरण से आर्थिक उन्नति और सामाजिक न्याय संभव है। बुधारी की नई तस्वीर पूरे देश के लिए प्रेरणा है—शिक्षा और सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की।

