जबलपुर, नवनीत दुबे। सियासत के खेल भी अजब-गजब होते हैं यह सब जानते हैं पर सियासी दिग्गजों और राजनीति के अनुभवी कब, कहां, कैसे-कौन, सा दाव खेलना है एक कला में माहिर होते हैं। लेकिन वहीं सियासत के नए उभरते चेहरे अपने वरिष्ठ की खुशामद कर करने की कला में तो माहिर होते हैं, पर अपने आदर्श दिग्गज नेताओं से यह गुण सीखना भूल जाते हैं कि मौका मौसम माहौल के अनुसार किस तरह रंग बदल कर खुद को सर्वश्रेष्ठ दर्शना है।
मुद्दे की बात पर आते हैं, बीते दिनों संस्कारधानी में एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल का टॉकशो रखा गया। जिसमें स्थानीय संवाददाता को पर्दे के पीछे कर वाकपटुता में गुड़ी, तीखे प्रश्नों की बौछार करने में माहिर पत्रकार महोदय बाहर से आए थे, और तिथि के हिसाब से कार्यक्रम स्थल में शुरू हुआ। पक्ष-विपक्ष के माननीय से जवाब-सवाल का दौर पहले तो सब ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन एकाएक माहौल गरमा गया, क्योंकि किसी मुद्दे वह विषय को लेकर पत्रकार महोदय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का नाम लेकर उन्हें घेरने की कोशिश की फिर क्या था, समर्पित कर्मठ भाजपाई आवेश में आ गए, और पत्रकार महोदय से ही भिड़ गए। जबलपुरिया अंदाज में धमकाने लगे, अब ऐसे में पत्रकार महोदय भी कहां पीछे हटने वाले थे, वह भी आवेश में आकर दो-दो हाथ आजमाने की बात करने लगे। यहां तक टॉकशो में एकत्र हुए भाजपाइयों के अभद्र व्यवहार के चलते कार्यक्रम में उपस्थित भाजपाइयों को गुंडा तक बोल दिया।

जिसका सीधा प्रसारण वहां उपस्थित कांग्रेस के माननीय देखकर मन ही मन प्रफुल्लित हो रहे थे। आखिर ऐसा हो भी क्यों ना विधानसभा चुनाव का समय जो नजदीक आ रहा है, और ऐसे में नामी-गिरामी न्यूज चैनल के पत्रकार महोदय के साथ हुआ अभद्र व्यवहार, संस्कारधानी से लेकर भोपाल दिल्ली तक प्रसारित हुआ। जिससे भाजपा की साख पर बट्टा तो लगा ही लगा और स्थानीय नेताओं की छवि भी दागदार हुई। जिसका लाभ कांग्रेस को मिला हालात परिस्थितियों को देखते हुए शहर में चटकारे लेकर आमजनों के बीच चर्चा हो रही है, की भाजपाई भैया लोगों का आग बबूला होना चुनावी सेहत पर गलत प्रभाव डाल रहा है?

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