राममय संस्कारधानी में तरुण, अन्नू का उत्साह…
नवनीत दुबे। जबलपुर-वैसे तो समूचा हिंदुस्तान राममय हो गया है, चहुंओर श्री राम के प्रति आस्था सिर चढ़कर बोल रही है, इसी क्रम में संस्कारधानी भी राममय हो गई है, लेकिन मुद्दे की बात ये है कि जहां एक ओर कांग्रेस आलाकमान द्वारा 22 जनवरी के निमंत्रण ठुकरा देना कांग्रेस को हाशिये पर ला दिया ह,ै तो वहीं संस्कारधानी में महापौर जगत बहादुर सिंह और पूर्व मंत्री तरुण भनोट की श्री राम आस्था चर्चा का विषय बनी हुई है, जिस तरह से बेनर पोस्टर लग रहे है और 22 जनवरी के स्वर्णिम दिन के लिए संस्कारधानी को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है उसमें तरुण ओर अन्नू की रामभक्ति देखते ही बन रही है, ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जहां कांग्रेस के आलाकमान राम के प्रति अनादर भाव को व्यक्त कर रहे है? वहीं कर्मठ कांग्रेसी भीतर ही भीतर आलाकमान की हठधर्मिता से व्यथित ओर दुखी है, हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेस की हो रही दुर्दशा के पीछे आलाकमान की श्री राम विरोधी सोच ही प्रमुख कारण है? और वर्तमान में जिस तरह से मोदी को निशाना बनाकर राम मंदिर की स्थापना पर सियासत हो रही है तो वहीं कटु सत्य ये भी है कि भाजपा की मोदी सरकार का ही दृढ़ संकल्प है कि आज सैकड़ों वर्षों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे सनातनियों को ये पावन अवसर दृष्टिगत हो रहा है, ओर ये बात कांग्रेसी भी भली भांति जानते है, लेकिन विडंबना ही कहेंगे कि संस्कारधानी के कुछ दिग्गज काँग्रेसी आलाकमान के मूर्खता पूर्ण निर्णय की जी-हुजूरी करते हुए सिर्फ विशेष वोटबैंक की चाह में चाहते हुए भी श्री राम के प्रति अपनी आस्था प्रकट नहीं कर पा रहे है, हालांकि तरुण भनोट ओर अन्नू सिंह ने जिस तरह से अपने भाव प्रकट किए है वह संस्कारधानी वासियों के हृदय में घर कर गया है, सूत्रों की माने तो बहुत जल्द कर्मठ, समर्पित कांग्रेसियों का कांग्रेस से मोहभंग हो रहा है और आलाकमान के प्रति नाराजगी और वैमनष्यता का भाव उबाल मार रहा है, इसी कड़ी में इस्तीफा का क्रम शुरू हो सकता है, जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से हो चुकी है, अब देखना ये है कि संस्कारधानी में श्री राम के अनुयायी कांग्रेसी कौंन से कदम उठाते है?

