अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको का मामला….
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले में इन दिनों 5 वां और 15 वें वित्त आयोग की सहायता राशि के भुगतान में भारी अनियमितताएं सामने आ रही है। अमरपुर जनपद के कई पंचायतों में सरपंच और सचिव शासन के दिशा—निर्देशों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से भुगतान कर रहे है। शासन द्वारा तय किए गए नियमों के तहत 15 वें वित्त आयोग की सहायता राशि का उपयोग गांव के विकास कार्यों, जल निकासी, सड़क निर्माण, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वहीं 5 वां वित्त आयोग की राशि का भी सरपंच ,सचिव धुंधले और अपठनीय बिलों के जरिए राशि निकालकर शासन को गुमराह कर रहे है। इस गड़बड़ी से पंचायतों में पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे है।
जाने क्या पूरा मामला….
दरअसल ताजा मामला जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको का आया है जहां सरपंच शिव प्रसाद यादव और सचिव छोटी बाई सैयाम के शासन के तय नियमों को नजर अंदाज कर अपने चहेते सप्लायर को 5 वां और 15 वें वित्त आयोग की राशि का मनमाना भुगतान किया गया है।
बता दें कि 15 वें वित्त आयोग टाइड फंड की राशि का उपयोग केवल निर्धारित विकास कार्यों के लिए किया जाना अनिवार्य है, जबकि अनटाइड फंड की राशि का उपयोग पंचायत की आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकता है। लेकिन सरपंच, सचिव के द्वारा इन निधियों का भुगतान बिना किसी ठोस कार्य के बिना जियो टैग, अमान्य फोटो लगाकर किया गया है ।
यहीं नहीं 5 वां वित्त आयोग की राशि का भी फर्जी भुगतान, धुंधले और अपठनीय बिलों के जरिए राशि निकालकर शासन को गुमराह कर रहे है, इस गड़बड़ी से पंचायतों में पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे है।
बता दें कि ग्राम पंचायत कोको सरपंच, और सचिव के द्वारा 15 वें वित्त की टाईट,अनटाईट फंड की राशि और 5 वां वित्त की राशि का गाईडलाइन के विपरीत, गलत तरीके से , किराना समान, चाय नाश्ता, हार्डवेयर सामग्री, अन्य व्यव, धुंधला बिल,फर्जी बिल, बिना प्रयोजन , बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपए का भुगतान अपने चहेते सप्लायर को मटेरियल खरीदी के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से किया गया है। हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी फर्जी, अमान्य फोटो, बिलों की जांच करे बिना ही लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर दिया गया है।

नियमों की अनदेखी, पारदर्शिता पर सवाल….
उल्लेखनीय यह है कि नियमों के मुताबिक,पंचायत में बिना किसी ठोस कार्य के भुगतान नहीं कर सकता है, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा विकास कार्यों की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया में भी गड़बड़ियां की जा रही है,जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे है।
सरपंच—सचिव के विरुद्ध कार्रवाई की दरकार…
अनियमितताओं के बावजूद उच्च अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण सरपंच और सचिव के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। विकास कार्यों में गड़बड़ी, सरकारी फंड के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी को लेकर ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें दर्ज करवाई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदारों के द्वारा लापरवाही रखने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है या फिर कार्रवाई खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगा…?



