जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खजरी माल का मामला…
केंद्रीय और राज्य सहायता राशि की खुलकर हो रही बंदरबांट,सरपंच, सचिव ने राशि आहरण का निकाल लिया है गजब फार्मूला, जीपीडीपी कुछ और बना रहे और खर्च कुछ और कर रहे है खैर….
डिंडौरी,राठौर रामसहाय मर्दन| इन दिनों जिले के सातों जनपद पंचायतों में सरपंच,सचिव के द्वारा मिलीभगत कर 5 वें वित्त और 15 वें वित्त की राशि का गाईडलाइन के विपरीत भुगतान कर ठिकाना लगाया जा रहा है।
दरअसल ताजा मामला जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खजरी का सामने आया है जहां सरपंच शांति बाई, और सुषमा धुर्वे के सचिव के द्वारा 5वें और 15 वें वित्त आयोग की राशि में भारी अनियमितता बरती जा रही है। बता दें कि ग्राम सरपंच,सचिव केंद्रीय सहायता 15 वें वित्त और राज्य 5वें वित्त का भुगतान गाइड लाइन के विपरीत, फर्जी बिल, बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपए का भुगतान अपने चहेते सप्लायर को मटेरियल खरीदी के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से किया जा रहा है, हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी फर्जी, धुंधले बिल अमान्य फोटो बिलों की जांच करे बिना ही लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर रहे है।

गाइडलाइन नियमानुसार…
अन्य ऐसे कार्य जो गैर अनुमत्य ना हों एवं जो जिला स्तरीय प्लानिंग समिति द्वारा अनुसंशा की जावे कि 15वें वित्त आयोग की अनुसंशा अनुसार किसी भी प्रकार का स्थापना व्यय, वेतन / मानदेय भुगतान, टेंट किराया, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकार्पण समारोह, एयर कंडीशनर, वाहन क्रय, विद्युत बिल, स्वल्पाहार पर व्यय,विज्ञापन / बैनर पर व्यय इस मद से नहीं किया जा सकेगा।
बता दें कि गांवों के विकास और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय मद के 15वें वित्त की प्राप्त राशि का ग्राम पंचायतों में गजब ही घोटाला किया जा रहा है। इस मद के लाखों रुपयों की बंदरबांट सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत के अधिकारी कर रहे है। इस मद की राशि के आहरण की भी गजब तोड़ इस तिकड़ी ने निकाल ली है। मजे की बात यह है कि सरकारी धन हड़पने का ऐसा खेल एक अकेले नहीं या बल्कि पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में चल रहा है। यही वजह है कि अधिकांश सरपंच , सचिव खाक से फलक तक जा पहुंचे है। 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और आहरण के लिए सरकार की गाइड लाइन के अनुसार यदि किसी को 50 हजार से ऊपर का भुगतान करना है तो उसके लिए तकनीकी स्वीकृति जरूरी होती है। इससे बचने के लिए सरपंच, सचिवों और जनपद के अफसर ने गजब तोड़ निकाल ली है। इस तोड़ के अनुसार 49 हजार, 45 हजार रुपए का आहरण किया जाने लगा है। इस योजना में एक विशेष बात यह भी है कि जीओ टैग जरूरी होता है, लेकिन यहां इस फार्मूले पर भी धता बताया जा रहा है। 50 हजार के नीचे की राशि में न तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता होती है न ही जीओ टैग की। सचिव, सरपंच अपनी मनमानी से मनचाहे हिसाब से खर्च दर्शाकर राशि का गबन कर रहे है।

ई ग्राम स्वराज में लगे बिलों के अनुसार अमरपुर जनपद पंचायत के खजरी ग्राम पंचायत में 2024-25 से 2025- 26 में 15वें वित आयोग के लगभग लाखों रुपयों के बिलों का भुगतान बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर सरपंच,सचिव के द्वारा बंदरबाट किया गया है। 15 वें वित्त योजना में प्रावधान है कि सरपंच, सचिव को ग्रामसभा में अनुमोदन कराकर ग्राम पंचायत विकास कार्यक्रम में चयनित कार्य को 60 -40 के रेसियो में कराना होता है। इसके तहत स्वच्छता में 30, शिक्षा में 30, अधो संरचना में 40 प्रतिशत प्लान के तहत केंद्रीय सहायता राशि 15वें वित्त से ग्राम पंचायत का विकास करना होता है, लेकिन जीपीडीपी कुछ और बनाते हैं और खर्च कुछ और करते है।



