फर्जी आदेश के विरुद्ध FIR करने थाना प्रभारी को जिला दंडाधिकारी का आदेश, बावजूद पुलिस कर रही अनदेखी…
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। डिंडौरी कलेक्टर के फर्जी आदेश जारी के विरुद्ध FIR दर्ज करने थाना प्रभारी करंजिया को अपर कलेक्टर को पत्र लिखे 07 दिन बीतने के बावजूद अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। कलेक्टर नेहा मारव्या ने 05 जून को थाना प्रभारी को आदेश जारी कर तत्काल सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज करते हुए समक्ष में उपस्थित होकर अवगत कराने का आदेश जारी किया है इसके 04 दिन गुजरने के बाद भी करंजिया थाना प्रभारी नरेंद्र पाल मामला दर्ज करने में कोताही बरत रहे हैं।
जबकि संबंधित पक्ष द्वारा 7 दिन पूर्व करंजिया थाना प्रभारी नरेंद्र पाल को इस संबंध में लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया था, जिसमें साफ तौर पर फर्जी आदेश के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।अपर कलेक्टर के द्वारा लिखे गए शिकायती पत्र में यह उल्लेख है कि कुछ दस्तावेजों पर कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर आदेश जारी किए गए। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर अवहेलना हुई है बल्कि यह मामला आपराधिक श्रेणी में भी आता है।
अब तक नहीं हुई FIR, बढ़ रही नाराजगी…
पत्र सौंपे जाने के 7 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस विभाग की ओर से कोई भी प्राथमिक जांच या FIR दर्ज नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि अगर उच्च अधिकारियों के नाम पर फर्जीवाड़ा हो सकता है और उस पर भी कार्रवाई न हो, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?
क्या कहता है कानून…?
किसी भी सरकारी दस्तावेज पर जानबूझकर फर्जी हस्ताक्षर या आदेश जारी करना भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में त्वरित FIR दर्ज कर जांच प्रारंभ की जानी चाहिए, लेकिन डिंडौरी में मामला अब तक सिर्फ फाइलों में दबा पड़ा है। इस पूरे मामले में अब तक पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लगातार चुप्पी ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया है।
इनका कहना है”
हमने मूल पत्र के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा है ,बिना मूल पत्र मिले FIR दर्ज नहीं हो सकता है।
नरेन्द्र पाल, थाना प्रभारी करंजिया जिला डिंडौरी।



