जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले में स्टे होने के बावजूद ज्वाइनिंग का आदेश निकालने पर मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की चीफ जनरल मैनेजर (एचआर) नीता राठौर पर 10 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने सीजीएम के दोनों आदेश भी निरस्त कर दिए जिसके तहत याचिकाकर्ता को रीवा में उनके जूनियर के अधीन पोस्टिंग व ज्वाइनिंग करने कहा गया था।
जबलपुर निवासी राजेश पटैल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के अग्रवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता एडिशनल डायरेक्टर को 16 फरवरी को डिमोशन करते हुए सीधी में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर ट्रांसफर कर दिया था।
सीधी में ज्वाइंट डायरेक्टर का पद ना होने से २२ मार्च को न्यायालय ने रोक लगा दी और कहा कि वर्तमान पद पर ही बने रहेंगे। इसके बाद 2 अप्रैल 2024 को सीजीएम नीता राठौर ने पुन: डिमोशन करते हुए याचिकाकर्ता की पोस्टिंग डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रीवा कर दी।
इस आदेश पर कोर्ट ने 13 अप्रैल को रोक लगा दी क्योंकि रीवा में याचिकाकर्ता से जूनियर उच्च पद ज्वाइंट डायरेक्टर पर पहले से कार्यरत थे। रोक के बावजूद सीजीएम ने 13 मई को याचिकाकर्ता को सीधी ज्वाइन करने का आदेश जारी कर दिया। न्यायालय ने इसे मनमाना आदेश पाते हुए निरस्त कर दिया और सीजीएम पर कॉस्ट अधिरोपित कर दी।

