साईडलुक, जबलपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए जबलपुर की प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अर्चना कोरचे ने इसे राष्ट्रव्यापी क्रांति का प्रतीक करार दिया है।
जबलपुर के रांझी स्थित सुभाष नगर में रहने वाली श्रीमती अर्चना कोरचे ने अपने लंबे सामाजिक सफर को साझा करते हुए कहा कि विवाह के बाद उनके ससुर की प्रेरणा से उन्होंने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी शुरू की। धीरे-धीरे वे जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए विभिन्न गतिविधियों में जुट गईं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने 5 हजार जरूरतमंदों को नियमित भोजन पहुंचाया और पलायन कर रहे मजदूरों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए।
सामाजिक कार्यों से सशक्त समाज की नींव
श्रीमती कोरचे गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्थानीय स्तर पर निरंतर कार्यक्रम चला रही हैं। वे नारी शक्ति के उदय को समाज की प्रगति का आधार मानती हैं। उनके अनुसार, यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगा और सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल देगा।
नीतियां होंगी अधिक संतुलित और भविष्योन्मुखी
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण से नीतियां अधिक संतुलित, मानवीय और दूरदर्शी होंगी। महिलाओं की स्वभावगत संवेदनशीलता व सहानुभूति इन नीतियों को मजबूत बनाएगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और महिला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में देश नई ऊंचाइयों को छूएगा।
महिलाओं से अपील: आगे आइए, जागरूक बनें
श्रीमती कोरचे ने हर बहन, बेटी, मां और महिला साथी से अपील की कि वे सक्रिय होकर इस अवसर को देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का माध्यम बनाएं। उन्होंने इस अभियान को साहसिक व दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि सामूहिक जनजागृति से समाज में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। इससे सकारात्मक व प्रगतिशील मानसिकता बनेगी।
श्रीमती कोरचे की यह सराहना नारी शक्ति के उत्थान में एक नया अध्याय जोड़ती नजर आ रही है।

