45 डिग्री तापमान के बीच अंधेरे में डूब रहे शहर और गांव, लोग बोले “रिकॉर्ड सप्लाई नहीं, रिकॉर्ड परेशानी मिल रही”
साईडलुक, (सत्यजीत यादव)। मध्यप्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी के साथ गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। प्रदेश के कई जिलों में अघोषित बिजली कटौती, लगातार पावर ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और घंटों बिजली गुल रहने की समस्या आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। राजधानी भोपाल से लेकर जबलपुर, सीहोर, ग्वालियर, छतरपुर, रीवा और ग्रामीण इलाकों तक लोग गर्मी और बिजली संकट की दोहरी मार झेल रहे हैं। लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच जनता अब सरकार के “बेहतर बिजली व्यवस्था” वाले दावों को जुमला बता रही है।
प्रदेश के कई हिस्सों में हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग रातभर सो नहीं पा रहे। कहीं हर आधे घंटे में बिजली ट्रिप हो रही है तो कहीं कई-कई घंटे तक सप्लाई बंद रहने से लोग छतों और सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। गर्म हवा के बीच पंखे और कूलर बंद पड़ते ही हालात और बिगड़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी की मोटरें नहीं चल पाने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है।
सीहोर में फूटा जनाक्रोश, गांव-गांव सड़क पर उतरे लोग
सीहोर जिले में बिजली संकट को लेकर जनता का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। लगातार कटौती और लो-वोल्टेज से परेशान ग्रामीणों ने कई गांवों में सड़क जाम और प्रदर्शन किए। लोगों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा। भीषण गर्मी के बीच हो रही कटौती को लेकर ग्रामीणों ने बिजली विभाग और सरकार दोनों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
राजधानी भोपाल और जबलपुर में भी बढ़ी परेशानी
भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। कई कॉलोनियों में 2 से 7 घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। जबलपुर में लगातार ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग से लोग परेशान हैं, जबकि भोपाल के कई इलाकों में लो-वोल्टेज के कारण एसी और कूलर तक सही से नहीं चल पा रहे। सोशल मीडिया पर लोग बिजली विभाग के खिलाफ लगातार नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
बढ़ती बिजली मांग और जर्जर सिस्टम बना बड़ी वजह
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल रिकॉर्ड गर्मी के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से ट्रांसफार्मर और फीडरों पर दबाव बढ़ गया है। कई जगह पुराने तार, कमजोर केबल और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर बार-बार फॉल्ट दे रहे हैं। इसी वजह से ट्रिपिंग और कटौती की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में संकट और गंभीर हो सकता है।
व्यापार, पढ़ाई और अस्पताल सेवाएं भी प्रभावित
बिजली संकट का असर अब आम जनजीवन से आगे बढ़कर कारोबार और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। छोटे उद्योग, दुकानें और बाजार बार-बार बिजली जाने से प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है, वहीं छोटे अस्पताल और क्लीनिक महंगे जनरेटर के भरोसे चल रहे हैं। कई व्यापारिक संगठनों ने भी बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग उठाई है।
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ सरकार और ऊर्जा विभाग रिकॉर्ड बिजली सप्लाई के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता लगातार कटौती और ट्रिपिंग से परेशान है। कई जगहों पर खुद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी आते ही यही संकट सामने आ जाता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया।
सोशल मीडिया पर बढ़ रहा गुस्सा
प्रदेशभर में बिजली संकट को लेकर सोशल मीडिया पर भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग वीडियो और पोस्ट साझा कर अपने क्षेत्रों की स्थिति बता रहे हैं। कई नागरिकों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं मिल रहा और हेल्पलाइन नंबरों पर भी संतोषजनक जवाब नहीं दिए जा रहे।

