काले कपड़ों में विपक्ष का प्रदर्शन, जवाबी मोर्चे पर NDA; शिक्षा, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर संसद परिसर में तेज़ हुई राजनीतिक जंग
साईडलुक, डेस्क। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को संसद परिसर के मकर द्वार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया। एक ओर विपक्षी सांसदों ने हाल के छात्र आंदोलनों, कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए जवाबी प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों की नारेबाज़ी और विरोध प्रदर्शन के कारण संसद परिसर का माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।
विपक्षी दलों का आरोप है कि हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग किया गया और सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों पर जवाब देने से बच रही है। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए। इसके विरोध में कई विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर मकर द्वार पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
उधर, एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देकर संसद की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा और सहयोगी दलों के सांसदों ने कहा कि सरकार शिक्षा सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष जनभावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है। एनडीए के प्रदर्शन का मुख्य केंद्र विपक्ष के हालिया प्रदर्शनों और राहुल गांधी की भूमिका को लेकर विरोध दर्ज कराना रहा।
संसद के भीतर भी इस टकराव का असर साफ दिखाई दिया। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने छात्र आंदोलन, कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार हंगामा किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नारेबाज़ी के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और दोनों सदनों को निर्धारित समय से पहले स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का कहना है कि देशभर में परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों की नाराज़गी ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है, इसलिए सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और आंदोलन के नाम पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार ने संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के मकर द्वार पर आमने-सामने हुए इन प्रदर्शनों ने यह संकेत दे दिया है कि मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज़ हो सकता है। शिक्षा, परीक्षा सुधार, छात्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था के मुद्दे अब संसद के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।

