वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल, रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार पर लाठी चलने का दावा, सादे कपड़ों में कार्रवाई को लेकर विवाद गहराया
साईडलुक, डेस्क। संसद कूच के दौरान हुए छात्र प्रदर्शन की कवरेज के बीच डिजिटल समाचार मंच लल्लनटॉप के एक रिपोर्टर को कथित रूप से दिल्ली पुलिस द्वारा लाठी से पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रिपोर्टर सादे कपड़ों में लाठी लिए मौजूद लोगों से यह सवाल पूछते दिखाई देते हैं कि वे बिना वर्दी के किस अधिकार से प्रदर्शनकारियों पर लाठी चला रहे हैं। इसी दौरान वीडियो में कुछ लोग रिपोर्टर पर भी लाठियां बरसाते हुए दिखाई देते हैं। इस घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस की कार्यप्रणाली और सादे कपड़ों में तैनात कर्मियों की भूमिका को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।
सवाल के तुरंत बाद लाठी चलने का वीडियो वायरल
वायरल वीडियो में रिपोर्टर लगातार यह जानने का प्रयास करते हैं कि लाठी चला रहे लोग कौन हैं और क्या वे दिल्ली पुलिस के कर्मचारी हैं। इसके कुछ ही क्षण बाद वीडियो में रिपोर्टर पर लाठी से हमला होता दिखाई देता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिसके बाद कई पत्रकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली पुलिस का पक्ष भी सामने आया
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर लगाए गए कई आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग किया गया और सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ दावे भ्रामक हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है। हालांकि वायरल वीडियो को लेकर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा है।
सादे कपड़ों में मौजूद लोगों की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सादे कपड़ों में मौजूद वे लोग कौन थे जो लाठी चलाते दिखाई दिए। विपक्षी दलों, पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने मांग की है कि यदि वे पुलिसकर्मी थे तो उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए और यदि नहीं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था ड्यूटी में कुछ कर्मियों की सादे कपड़ों में भी तैनाती की जाती है।
प्रेस की स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस
घटना के बाद मीडिया संगठनों ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों को बिना भय के रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। यदि ड्यूटी के दौरान किसी पत्रकार के साथ बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की समीक्षा तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

