‘सेव डेमोक्रेसी, सेव कॉन्स्टिट्यूशन’ अभियान के तहत सुप्रीम कोर्ट परिसर में जुटे अधिवक्ता, छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की उठी मांग
साईडलुक, डेस्क। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अब देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़े वकील भी खुलकर सामने आ गए हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने एकत्र होकर संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक वाचन किया और इसे लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के मूल संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। यह कार्यक्रम “सेव डेमोक्रेसी, सेव कॉन्स्टिट्यूशन” अभियान के तहत आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता *इंदिरा जयसिंह* और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता *डॉ. एस. मुरलीधर* ने किया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष डॉ. विकास सिंह सहित अनेक वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने इसमें भाग लिया। कई वकील हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रति लेकर उपस्थित हुए तथा प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया।
वकीलों ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। उनका कहना था कि जब नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज़ उठाते हैं, तब विधि समुदाय का दायित्व बनता है कि वह संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन के पक्ष में खड़ा रहे।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह प्रदर्शन वकीलों के किसी निजी हित के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के न्याय और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के समर्थन में आयोजित किया गया है। वहीं डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि विधि समुदाय छात्रों के साथ खड़ा है और न्याय की मांग का समर्थन करता है।
इससे पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) तथा 650 से अधिक अधिवक्ताओं ने अलग-अलग बयान जारी कर कथित अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की थी। उन्होंने घटना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने तथा घायल छात्रों और वकीलों को उचित उपचार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई थी।
उधर जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, हिरासत, भूख हड़ताल और संवैधानिक अधिकारों को लेकर विवाद ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट परिसर में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन आंदोलन के समर्थन में विधि समुदाय की अब तक की सबसे प्रमुख सार्वजनिक अभिव्यक्तियों में से एक माना जा रहा है।

