श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का महापर्व, आज घर-घर में हो रही गुरु वंदना, मंदिरों और आश्रमों में उमड़ा आस्था का सैलाब
साईडलुक, जबलपुर। आज आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में गुरु पूर्णिमा का महापर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और जीवन में ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं का वंदन करते हैं।
क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज ही के दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों की रचना की और महाभारत जैसे महाकाव्य का सृजन किया। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है और गुरु ही शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
गुरु का महत्व
कहा गया है कि गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः। गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं। जीवन में माता-पिता जन्म देते हैं लेकिन गुरु जीवन जीने की कला सिखाते हैं। चाहे वह शिक्षा के गुरु हों, दीक्षा के गुरु हों या आध्यात्मिक गुरु हों, भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है।
आज क्या हो रहा है शहर में
आज जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में मंदिरों, मठों, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों में गुरु पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही शिष्य अपने गुरुओं के आश्रम पहुंचकर पादुका पूजन, गुरु वंदना और आशीर्वाद ले रहे हैं। कई जगहों पर भंडारे, सत्संग और भजन संध्या का आयोजन किया गया है। स्कूलों और कॉलेजों में भी विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान कर रहे हैं।
आज का संदेश
आज का दिन हमें यह सिखाता है कि जीवन में अहंकार छोड़कर विनम्रता के साथ गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा ही जीवन में सफलता और शांति का आधार है।
आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।

