दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और ब्रह्माकुमारीज की संस्था आरईआरएफ के बीच हुआ एमओयू, राज्य मंत्री बीएल वर्मा बोले- यह सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम
साईडलुक, नई दिल्ली। दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि हमारा लक्ष्य एक ऐसे समावेशी समाज का निर्माण करना है, जहां किसी व्यक्ति की पहचान उसकी अक्षमता से नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं, प्रतिभा, दक्षता और संभावनाओं से हो। डॉ. कुमार बुधवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में दिव्यांग समानता, संरक्षण एवं सशक्तीकरण अभियान यानी डीआईएसएसएसए के शुभारंभ के लिए आयोजित समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह को संबोधित कर रहे थे।
यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और ब्रह्माकुमारीज की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन रिसर्च फाउंडेशन के बीच हुआ है। इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए समाज की सार्थक भागीदारी और सामाजिक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक तथा सेवा उन्मुख संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का प्रभावी मॉडल साबित होंगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानूनों और योजनाओं का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उनका लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सुलभ तरीके से पहुंचे। उन्होंने भरोसा जताया कि आरईआरएफ का अनुभव, पहुंच और नेटवर्क दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण में अहम योगदान देगा। जब एक दिव्यांगजन सशक्त होता है तो उसका लाभ केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र को मिलता है।
समारोह में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने इस अवसर को सामाजिक सेवा, समानता और समावेशन की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना तथा उनके लिए समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन, परिवारों और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ध्यान केवल कठिनाइयों को कम करने पर नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और संभावनाओं को पहचान कर उन्हें अपनी पूर्ण क्षमता का अहसास कराने के अवसर देने पर भी होना चाहिए। यह पहल सामाजिक समानता, गरिमा और समावेशन को मजबूत करेगी और दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास के साथ राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा में भाग लेने में सक्षम बनाएगी।
इस दौरान ब्रह्माकुमारीज प्रबंधन समिति की सदस्य राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने बताया कि संस्था पिछले 18 वर्षों से दिव्यांगजनों, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के सशक्तीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। इस अवधि में समर्पित कार्यक्रम और व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं। स्थानीय प्राधिकरणों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित टीमें दो समर्पित वैन के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचती हैं। ब्रेल आधारित संसाधन, अध्यापन बोर्ड, खेल और अन्य प्रशिक्षण सामग्री के जरिए एकाग्रता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में मदद की जाती है। माउंट आबू में राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन और संगोष्ठियां भी आयोजित की जाती हैं।
अपने स्वागत संबोधन में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के संयुक्त सचिव राजीव शर्मा ने कहा कि डीआईएसएसएसए पहल सरकारी प्रयासों को पूरक बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग की दीनदयाल दिव्यांग पुनर्वास योजना के तहत देशभर में लगभग 350 से 400 परियोजनाओं को सहायता दी जा रही है, जो दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ध्यान, राजयोग और विश्राम अभ्यासों में सहयोगी संगठनों की विशेषज्ञता बच्चों के समग्र विकास में मानसिक कल्याण, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देगी।
डीआईएसएसएसए अभियान एक राष्ट्रव्यापी पहल है जो सक्षम वातावरण बनाने और समानता, समावेशन और सशक्तीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह अभियान शारीरिक, शैक्षणिक और पुनर्वास सहायता के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर भी ध्यान देगा। इसके तहत खुशी, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मूल्य आधारित खेल और प्रेरणादायक गीत, माता-पिता और समुदाय के साथ बैठकें, नशामुक्ति, स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां तथा असफलता के डर, हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी जैसी मनोवैज्ञानिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रदर्शन और ध्यान सत्र शामिल होंगे। अभियान को कई राज्यों में प्रशिक्षित टीमों के माध्यम से लागू किया जाएगा और इसमें दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, अधिगम और बौद्धिक दिव्यांगता सहित विभिन्न श्रेणियों के व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा। स्थानीय संपर्क के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में कार्यक्रम आयोजित होंगे। यह समझौता ज्ञापन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास की भावना के अनुरूप है। कार्यक्रम में राजयोगी बीके ललित भाई, बीके विधात्री, बीके रजनी, बीके प्रीति सहित विभाग के निदेशक विनीत सिंघल, अवर सचिव मनीष कुमार मिश्रा और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

