‘खेती और डेयरी पर खतरे’ का आरोप, हजारों किसानों के दिल्ली पहुंचने की तैयारी, कई राज्यों से जत्थे रवाना
साईडलुक, डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील/एफटीए) के विरोध में मंगलवार को देश के विभिन्न राज्यों से किसान संगठनों ने दिल्ली कूच का आह्वान किया है। किसान संगठनों का आरोप है कि यदि प्रस्तावित समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया गया तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे और मध्यम किसानों, पशुपालकों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने का दावा किया गया है।
पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से रवाना हुए किसान
किसान संगठनों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से किसान जत्थों के रूप में दिल्ली की ओर रवाना हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल व्यापार समझौते का विरोध नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), ग्रामीण रोजगार और खाद्य सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर भी है। कुछ किसान नेताओं ने दावा किया है कि देशभर के सैकड़ों किसान संगठनों और यूनियनों का इस आंदोलन को समर्थन प्राप्त है।
दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ी, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
दिल्ली में प्रस्तावित किसान महापंचायत को देखते हुए राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने कई संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है, जबकि प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग भी की गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि किसान घाट और मध्य दिल्ली के आसपास यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
शंभू बॉर्डर पर भी सख्ती
पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को देखते हुए हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर भी प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार सीमा पर बैरिकेडिंग बढ़ाई गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, जबकि किसान संगठन शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की बात कह रहे हैं।
किसानों की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?
किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सस्ते कृषि और डेयरी उत्पादों के आयात का रास्ता खुल सकता है, जिससे भारतीय किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका यह भी आरोप है कि समझौते के मसौदे पर किसानों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया। किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को किसी भी व्यापार समझौते से पूरी तरह बाहर रखा जाए तथा एमएसपी और घरेलू कृषि हितों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि व्यापार वार्ताओं में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि संवेदनशील कृषि उत्पादों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और किसी भी अंतिम समझौते में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च रखा जाएगा। हालिया वार्ताओं में भी सरकार ने संकेत दिया है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भारत ने अपना रुख सख्त रखा है।
आंदोलन पर देशभर की नजर
किसानों के दिल्ली कूच के कारण राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की है, जबकि प्रशासन सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। किसान नेताओं ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

