दिल्ली की कार्रवाई के विरोध में कई राज्यों में सड़क पर उतरे कार्यकर्ता, मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी गूंजा विरोध
साईडलुक, नई दिल्ली/जबलपुर। देश की राजनीति सोमवार को उस समय गरमा गई जब संसद और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों पर उतर आए।
इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के मालवीय चौक पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी समर्थकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हिरासत की कार्रवाई का विरोध किया। कुछ समय के लिए मालवीय चौक क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं।
दिल्ली में हुई कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। हिरासत की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के बाद लखनऊ, वाराणसी और अन्य शहरों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और कुछ नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि दिल्ली में हाल के छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हुई है। जंतर-मंतर और संसद क्षेत्र में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था। दिल्ली पुलिस का दावा है कि हालिया हिंसक घटनाओं में उसके 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि विपक्ष पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष की हिरासत के बाद यह मुद्दा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। संसद से लेकर राज्यों की सड़कों तक विरोध और जवाबी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

