छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई में बढ़े कार्यकर्ता
साईडलुक, डेस्क। राजधानी दिल्ली में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास की ओर कांग्रेस के विरोध मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई। छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। इस दौरान पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने प्रधानमंत्री आवास के आसपास तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा लागू कर दिया। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और विशेष सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब, छात्रों के मुद्दे पर तेज किया आंदोलन
कांग्रेस का कहना है कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से छात्रों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की मांग की।
प्रधानमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा को देखते हुए पूरे क्षेत्र को तीन सुरक्षा घेरों में विभाजित किया गया। बाहरी घेरे में दिल्ली पुलिस और यातायात पुलिस की तैनाती की गई, दूसरे घेरे में केंद्रीय सुरक्षा बलों को लगाया गया, जबकि सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरा विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के नियंत्रण में रहा। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई, वाहनों की सघन जांच की गई और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई।
दिल्ली पुलिस ने संभाला मोर्चा
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड लगाकर रोका गया ताकि प्रधानमंत्री आवास के उच्च सुरक्षा क्षेत्र तक किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच न हो सके। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की और सुरक्षा नियमों का पालन करने पर जोर दिया।
राजधानी की राजनीति में बढ़ा तापमान
छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति को भी गर्मा दिया है। विपक्ष इसे युवाओं और छात्रों की आवाज से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार का पक्ष है कि संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस विरोध प्रदर्शन के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद जारी रहता है तो यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक आने वाले दिनों में प्रमुख राजनीतिक विषय बना रह सकता है। फिलहाल राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और प्रधानमंत्री आवास सहित आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

