न्याय की रोशनी के साथ आंखों की रोशनी का भी रखा गया ख्याल, 49 बच्चों की जांच में 12 में मिली समस्या, देव जी नेत्रालय में होगा मुफ्त इलाज
साईडलुक, जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया के मार्गदर्शन और सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव के निर्देशन में शुक्रवार 18 जुलाई को जबलपुर के गोकलपुर स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह एवं शासकीय बाल गृह में एक सार्थक पहल की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर द्वारा यहां निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर और विधिक जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया।
यह शिविर दादा वीरेंद्रपुरी जी नेत्र संस्थान जबलपुर के सहयोग से आयोजित हुआ। संस्थान के संस्थापक डॉ. पवन स्थापक के मार्गदर्शन में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता साहू ने अपनी टीम के साथ बाल संप्रेक्षण गृह के 39 बालकों और बाल गृह के 10 बच्चों सहित कुल 49 बच्चों का बारीकी से नेत्र परीक्षण किया। इस पुनीत कार्य में श्री नरेंद्र मालवीय और श्री अनुज यादव ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
परीक्षण के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। बाल संप्रेक्षण गृह के 9 बच्चों में रिफ्रैक्शन और डाइलेशन संबंधी समस्या पाई गई, जबकि बाल गृह के 3 बच्चों में इसोट्रोपिया यानी भेंगापन की समस्या चिन्हित की गई। राहत की बात यह है कि इन सभी 12 बच्चों के लिए उम्मीद की किरण जगी है। डॉ. पवन स्थापक ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए इन सभी बच्चों का निःशुल्क उपचार अपने संस्थान दादा वीरेंद्रपुरी जी नेत्र संस्थान यानी देव जी नेत्रालय में करने की सहमति प्रदान की है। जल्द ही इन बच्चों को आगे के चिकित्सकीय परीक्षण और उपचार के लिए संस्थान भेजा जाएगा।
बच्चों को बताए अपने अधिकार, हेल्पलाइन 15100 की दी जानकारी
नेत्र परीक्षण के साथ ही बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विधिक जागरूकता शिविर भी लगाया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर की सचिव श्रीमती शक्ति वर्मा ने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके विधिक अधिकारों और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बच्चों के लिए संचालित मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय पाने का अधिकार हर बच्चे का है और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने यह भी बताया कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति निःशुल्क कानूनी सलाह और सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 15100 पर कॉल कर सकता है।
अपने संबोधन में श्रीमती वर्मा ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे जीवन में अनुशासन, शिक्षा और सकारात्मक सोच को अपनाएं। उन्होंने प्रेरणा दी कि संस्थान से बाहर निकलने के बाद वे एक जिम्मेदार, जागरूक और आदर्श नागरिक बनकर समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित करें।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सहायक ग्रेड-3 श्री अमर कुमार बर्मन और आदेश तामीलकर्ता श्री अविनाश चौधरी की सक्रिय भूमिका रही। वहीं शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह की ओर से अधीक्षक श्री शैलेश श्रीवास्तव, हाउस मास्टर श्री अनुज शर्मा सहित समस्त स्टाफ ने शिविर के आयोजन में भरपूर सहयोग दिया।

