कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, एक केंद्र पर बिन लाइसेंस का खेल तो दूसरे पर किसानों से लूट, 1600 रुपये में बेची जा रही थी डीएपी
साईडलुक, जबलपुर। जिले में खाद की कालाबाजारी और किसानों से मनमानी वसूली करने वाले दो कृषि केंद्र संचालकों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने मझगवां सिहोरा और बरगी क्षेत्र के दो प्रतिष्ठानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
उप संचालक कृषि उमेश कटहरे से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में उर्वरकों की अवैध बिक्री और अधिक दर पर खाद बेचने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने छापामार अभियान चलाया था। इसी अभियान के तहत अनुविभागीय कृषि अधिकारी श्रीमती मनीषा पटेल और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक जयपाल सिंह राठौर की टीम ने मझगवां सिहोरा स्थित मेसर्स न्यू गोस्वामी कृषि केंद्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि प्रतिष्ठान के संचालक राकेश गोस्वामी द्वारा लाइसेंस की शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए अनधिकृत स्रोतों से उर्वरक लाकर व्यापार किया जा रहा था।
इसी तरह किसानों की शिकायत पर दूसरी कार्रवाई कालादेही बरगी स्थित जानकी कृषि केंद्र पर की गई। अनुविभागीय कृषि अधिकारी जबलपुर श्रीमती प्रतिभा गौर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक श्रीमती रश्मि परसाई, कृषि विस्तार अधिकारी सोनम जैन और श्री प्रजापति की संयुक्त टीम ने जब इस केंद्र का निरीक्षण किया तो यहां किसानों से खुलेआम लूट की जा रही थी। संचालक बलिराम चौकसे द्वारा किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दर पर खाद बेची जा रही थी और तो और दुकान पर मूल्य सूची तक प्रदर्शित नहीं की गई थी।
निरीक्षण के दौरान किसानों ने आपबीती सुनाई जिसने इस कालाबाजारी की पोल खोल दी। किसान कृष्ण कुमार चढ़ार ने बताया कि उन्होंने 9 जुलाई को 10 बोरी डीएपी 1600 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से कुल 16 हजार रुपये में खरीदी जिसका भुगतान उन्होंने ऑनलाइन किया था। वहीं दूसरे किसान प्रेम चंद कुर्मी ने बताया कि उनके पुत्र राज कुर्मी के नाम पर खाद का टोकन बुक था लेकिन केंद्र संचालक ने निर्धारित शासकीय मूल्य के बजाय प्रति बैग 1600 रुपये की मांग की।
उप संचालक कृषि ने बताया कि दोनों ही मामलों में पाई गई अनियमितताएं बेहद गंभीर प्रकृति की हैं। इसे देखते हुए दोनों प्रतिष्ठानों के संचालकों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धाराओं के तहत आज शनिवार को क्रमशः बरगी और मझगवां थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उप संचालक ने दोहराया कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि कृषि आदान सामग्री खरीदते समय बिल अवश्य लें ताकि कालाबाजारी करने वालों पर सबूत के साथ कार्रवाई की जा सके।

