शिवसेना (UBT) सांसद बोलीं- लोकतांत्रिक विरोध का जवाब संवाद से नहीं, पुलिस कार्रवाई से दिया गया; जंतर-मंतर की घटना पर सियासत तेज
साईडलुक, डेस्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे CJP (Cockroach Janta Party) के आंदोलन के दौरान 20 दिन से अधिक समय तक भूख हड़ताल पर रहे सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस घटनाक्रम पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि *”अनशन खत्म कराने के लिए मंत्री भेजने के बजाय सरकार ने दिल्ली पुलिस भेज दी। लोग इसे नहीं भूलेंगे।”
सरकार पर संवाद की बजाय बल प्रयोग का आरोप
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने बयान में कहा कि यदि सरकार वास्तव में आंदोलनकारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेती तो वह बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि या संबंधित मंत्री को भेजती। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन का समाधान संवाद से निकलना चाहिए, न कि पुलिस कार्रवाई से। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति को सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है और यदि किसी आंदोलनकारी की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक थी तो चिकित्सा सहायता के साथ-साथ राजनीतिक संवाद भी आवश्यक था।
20 दिन से अधिक की भूख हड़ताल के बाद पुलिस की कार्रवाई
सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे। आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चलाया जा रहा था। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। दिल्ली पुलिस ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया, जिससे मौके पर हल्का तनाव भी पैदा हुआ।
आंदोलनकारियों ने कार्रवाई पर जताई आपत्ति
आंदोलन से जुड़े लोगों ने दावा किया कि वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया और इसे शांतिपूर्ण आंदोलन में हस्तक्षेप बताया। वहीं उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बातचीत का रास्ता अपनाने के बजाय पुलिस बल का उपयोग किया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल उनकी जान बचाने और चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी थी चिंता
अनशन के दौरान जारी चिकित्सा बुलेटिनों में बताया गया था कि लंबे उपवास के कारण सोनम वांगचुक का वजन लगातार कम हुआ और शरीर में निर्जलीकरण तथा इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बढ़ गया था। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता जताई थी। इन्हीं परिस्थितियों को आधार बनाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
संसद मार्च की तैयारी जारी
वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि आंदोलन जारी रहेगा और उन्होंने स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। संगठन ने संसद मार्च की अपनी घोषणा भी दोहराई, हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित मार्च के लिए आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया अलग से लागू होगी।
राजनीतिक बहस हुई तेज
जंतर-मंतर की घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप की गई। आने वाले दिनों में संसद मार्च और शिक्षा सुधार को लेकर चल रहा आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

