सीसीपीए ने फ्लाइट बुकिंग में जबरन स्पाइस क्लब में जोड़ने और पहले से टिक चेकबॉक्स के खेल को माना अनुचित व्यापार, कहा तकनीकी खामी का बहाना नहीं चलेगा
साईडलुक, (सत्यजीत यादव) । ऑनलाइन फ्लाइट बुकिंग के दौरान यात्रियों को भ्रमित कर अपनी योजनाओं में फंसाने का मामला अब एयरलाइन कंपनी स्पाइस जेट को भारी पड़ गया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी सीसीपीए ने स्पाइस जेट लिमिटेड पर उसकी बुकिंग वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न्स यानी भ्रामक डिजाइन प्रथाओं का इस्तेमाल करने के आरोप में एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में की गई है।
सीसीपीए की जांच में सामने आया कि स्पाइस जेट अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को चतुराई से अपने स्पाइस क्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में स्वतः ही नामांकित कर रही थी। इसके लिए पहले से ही टिक किए गए चेकबॉक्स का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी तरह यात्रियों को प्रमोशनल मैसेज भेजने के लिए भी उनकी बिना किसी स्पष्ट सहमति के डिफॉल्ट विकल्प पहले से ही चुना हुआ दिखाया जा रहा था, जबकि उपभोक्ता ने खुद से कोई क्रिया नहीं की थी।
खास बात यह रही कि सीसीपीए द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी कंपनी ने अपनी हरकत नहीं छोड़ी। उसने पुराने तरीके को बदलकर उसी प्रथा को नए रूप में जारी रखा और भविष्य में टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से संदेश भेजने के लिए फिर से एक अन्य पहले से टिक किया गया चेकबॉक्स दिखाना शुरू कर दिया।
पूरी प्रक्रिया के दौरान जब कंपनी से जवाब मांगा गया तो स्पाइस जेट ने इसे तकनीकी त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। लेकिन प्राधिकरण ने इस दलील को खारिज कर दिया और कंपनी को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और उन्हें स्थायी रूप से लागू रखने के लिए एक शपथ पत्र के रूप में अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है।
तीन तरह के डार्क पैटर्न्स पकड़े गए
सीसीपीए ने स्पाइस जेट के प्लेटफॉर्म पर तीन प्रमुख डार्क पैटर्न्स की पहचान की है। पहला है मजबूर कार्रवाई यानी फोर्स्ड एक्शन, जिसमें पहले से टिक चेकबॉक्स के जरिए उपभोक्ताओं को जबरन लॉयल्टी प्रोग्राम में जोड़ना शामिल है। दूसरा है इंटरफेस इंटरफेरेंस, जिसमें कंपनी ने अपने फायदे के लिए पसंदीदा विकल्प को डिफॉल्ट के रूप में पेश कर उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित किया। तीसरा है छलपूर्ण प्रश्न यानी ट्रिक क्वेश्चन, जिसमें भ्रमित करने वाली और नकारात्मक शब्दों वाली सहमति भाषा का प्रयोग किया गया जो यात्रियों को गुमराह कर सकती थी।
प्राधिकरण ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी प्रथाएं उपभोक्ता की स्वायत्तता को सीधे प्रभावित करती हैं और उनके सूचित निर्णय लेने के अधिकार को कमजोर करती हैं। यह निष्पक्ष और पारदर्शी व्यापार के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन
जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी का यह आचरण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं, अनुचित अनुबंधों और भ्रामक प्रस्तुतियों से संबंधित प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण ई कॉमर्स नियम 2020 के नियम 4(9) का भी उल्लंघन है जो स्पष्ट और सकारात्मक कार्रवाई के माध्यम से उपभोक्ता की सहमति लेना अनिवार्य करता है। कंपनी ने डार्क पैटर्न्स की रोकथाम एवं नियमन हेतु जारी दिशानिर्देश 2023 का भी उल्लंघन किया है।
अपने आदेश में सीसीपीए ने दोहराया है कि उपभोक्ता की सहमति हमेशा स्पष्ट, सूचित और स्वतंत्र रूप से दी गई होनी चाहिए। पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स, डिफॉल्ट सेटिंग्स या भ्रामक इंटरफेस डिजाइन के जरिए ली गई सहमति किसी भी सूरत में मान्य नहीं है और यह उपभोक्ता कल्याण और कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। प्राधिकरण ने कहा कि वह उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म निष्पक्ष, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित तरीके से व्यापार करें।

