छात्र आंदोलन पर संसद से सड़क तक सियासी संग्राम, विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को बताया लोकतंत्र पर हमला
साईडलुक, डेस्क। देशभर में छात्र आंदोलनों और हाल ही में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को विपक्षी दलों ने संसद परिसर के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रीय जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद के मकर द्वार के निकट एकत्र हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
काले वस्त्रों के जरिए जताया विरोध, सरकार से मांगा जवाब
विपक्षी सांसदों ने काली शर्ट, काली साड़ी, काली पट्टी और काला दुपट्टा पहनकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जवाब मांगा। विपक्ष का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार बल प्रयोग किया गया, उससे देशभर के युवाओं में असंतोष बढ़ा है और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तृत बयान देना चाहिए।
छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा
हाल के दिनों में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। दिल्ली में संसद कूच के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग, हिरासत और भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और निषेधाज्ञा का पालन कराने के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई की गई।
संसद के भीतर भी उठा मुद्दा
विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद के दोनों सदनों में भी उठाया और छात्रों पर हुई कार्रवाई पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। वहीं सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन
संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। दिल्ली पुलिस और संसद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी रखी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। हालांकि संसद के भीतर और बाहर छात्र आंदोलन तथा पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही।
आगे भी जारी रह सकता है विरोध
विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती, तो संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रह सकते हैं। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी मामले में तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

