शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठी चिंगारी बनी राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा, सड़कों पर छात्र, आमने-सामने राजनीतिक दल
साईडलुक, डेस्क। देशभर में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और हाल के छात्र आंदोलनों को लेकर बुधवार को कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए। दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन का दायरा बढ़ा और विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी, धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं सामने आईं, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई।
दिल्ली में छात्र आंदोलन के समर्थन में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया, जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन का राजनीतिकरण किया जा रहा है और विपक्ष इसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर रहा है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव देखने को मिला।
कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। बेंगलुरु में भाजपा कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। विजयवाड़ा में भी कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी, जबकि पटना में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की भी खबरें सामने आईं।
विपक्ष का आरोप है कि हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। सरकार का यह भी कहना है कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों में सुधार की प्रक्रिया जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों का यह आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है। इसी कारण विभिन्न राजनीतिक दल भी खुलकर इस आंदोलन के पक्ष या विपक्ष में अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर आए हैं।
देश के कई शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे देशभर में जारी तनाव कम हो पाएगा।

